गोरखपुर। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं लौटने से नाराज नगर आयुक्त ने सभी एजेंसियों से अब तक उपलब्ध कराए गए सफाई कर्मचारियों का ब्योरा तलब किया है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर जल्द ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया गया तो एजेंसियों को काम से हटाने के साथ ही उन्हें ब्लैकलिस्ट भी कर दिया जाएगा।
शहर की सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने की जिम्मेदारी एक अगस्त से मुंबई और सहारनपुर की एजेंसियों को दी गई है। शहर की गलियों-नालियों की सफाई के अलावा डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और उसे डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाने का काम इन्हें की करना है। वहीं पूर्व में कार्यरत 14 एजेंसियों को मुख्य सड़कों की सफाई का जिम्मा दिया गया है। लेकिन पुरानी एजेंसियों ने न तो अपने कर्मचारियों का ब्योरा दिया और न ही नई एजेंसी के कर्मचारियों को काम पर जाने दिया। ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था पटरी से उतर गई। एजेंसियों विशाल प्रोटेक्शन फोर्स और हिंदुस्तान सिक्योरिटी द्वारा आंशिक रूप से ही श्रमिकों की आपूर्ति की जा रही है।
1000 और कर्मी करेंगे सफाई
गोरखपुर। नगर आयुक्त प्रेमप्रकाश सिंह ने कहा कि जल्द ही शहर की सफाई व्यवस्था बेहतर हो जाएगी। इसके लिए नगर निगम ने सफाई कर्मियों की संख्या एक हजार और बढ़ाकर 3850 कर दी है। इनमें से करीब 2700 कर्मचारी शहर की गलियों, मोहल्लों और नालियों की सफाई करेंगे। वहीं 564 स्थायी सफाई कर्मचारी और 650 आउटसोर्सिंग वाले कर्मचारी शहर के मुख्य मार्गों की सफाई के अलावा इमरजेंसी गैंग, शहर के यूरिनलों की सफाई आदि का काम करेंगे।
इनपर है सफाई की जिम्मेदारी
- विशाल प्रोटेक्शन फोर्स, हिंदुस्तान सिक्योरिटी कंपनी के कर्मचारी - 2636
- आउटसोर्सिंग व अन्य फर्म के कर्मचारी - 640
- नगर निगम के स्थायी कर्मचारी - 564
ये हैं नगर निगम के सफाई ठेकेदार
अनिल कुमार सिंह, धनपति देवी सेवा संस्थान, बजरंग बहादुर सिंह, संजय कुमार सिंह, मनीष सिंह, एसके एसोसिएट्स, आरके ट्रेडर्स, बसंत शुक्ला, सुभाष सिंह, मां शीतला प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स प्रगति, गुलाब चंद सिन्हा, सुनीता एसोसिएट्स, सुनी कुमार सिंह