मोबाइल लूट में पकड़े गए आरोपी को छुड़ाने के लिए 50 हजार रुपये घूस लेने के आरोप में भाजपा से निष्कासित सरिता सिंह की जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने निकाय चुनाव को आधार बनाकर इसे विरोधियों की साजिश बताया था, मगर अपर सत्र न्यायाधीश शिवानंद सिंह ने इस तर्क को खारिज करते हुए जमानत की मंजूरी नहीं दी।
कोर्ट में जमानत अर्जी का विरोध करते हुए एडीजीसी हरिनारायण यादव ने कहा कि उनके खिलाफ प्रभा पांडेय ने केस दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि प्रभा पांडेय की पड़ोसी रीता पांडेय के बेटे हर्षित को 13 अक्टूबर की रात 11 बजे कैंट एसआई राजकुमार घर में घुसकर जबरदस्ती उठा ले गए थे और फर्जी केस में फंसाने की धमकी दी थी। वादिनी ने इस बाबत सरिता सिंह से बात की तो वे कैंट थाने आईं। पुलिस वालों से बात की और 50 हजार रुपये की मांग की। कहा कि गोरखनाथ मंदिर के द्वारिका तिवारी के माध्यम से हर्षित को छुड़ा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि द्वारिका तिवारी से बात हो गई है।
वादिनी ने 50 हजार रुपए सरिता सिंह को दे दिए। उसके बाद उनका फोन बंद हो गया और पुलिस ने भी हर्षित को मोबाइल लूटने के आरोप में जेल भेज दिया। सरिता सिंह ने 50 हजार रुपये हड़प लिए। कोर्ट में सरिता सिंह की ओर से कहा गया कि वे पार्षद पद की प्रत्याशी हैं और चुनाव लड़ने से रोकने के लिए विरोधी फंसा रहे हैं। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत अर्जी निरस्त कर दी।