मिलावटखोर ही नहीं बाजार में पैर जमा रहीं छोटी-बड़ी कंपनियां भी हमारी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। तय दर का 100 फीसदी भुगतान करने के बाद भी हमें 100 फीसदी गुणवत्ता वाला सामान नहीं मिल रहा। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़े बोल रहे हैं। मार्च 2016 से अब तक विभाग को मिले नमूनों की जांच रिपोर्ट में 50 फीसदी फेल पाए गए हैं। इनमें ज्यादातर नमूने मानक की कसौटी पर खरे नहीं उतर सके तो करीब 100 नमूने पैकेजिंग के मानक को पूरा नहीं कर सके। इनमें घी, मसाला, तेल, आटा, नमक, दूध, दूध से बने उत्पाद, मिठाई, नमकीन, आईस्क्रीम समेत सभी तरह के खाद्य पदार्थ शामिल हैं।
मार्च 2016 से जून 2017 की कार्रवाई रिपोर्ट
निरीक्षण: 1470
नमूने लिए: 776
जांच रिपोर्ट: 754
नमूने फेल : 366
अद्योमानक मिले:258
मिथ्या छाप: 99
वाद दाखिल हुए: 261
वाद में सजा: 155
अर्थदंड :12.23 लाख
सजा : एक को (दूध का नमूना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए जाने पर सिविल कोर्ट ने दी)
पतंजलि का घी पास, शहद, नूडल्स की हो रही जांच
कैंपियरगंज स्थित मछली गांव से लिया गया पतंजलि घी का नमूना जांच में पास हो गया। हालांकि खाद्य सुरक्षा विभाग ने गुरुवार को धर्मशाला बाजार से शहद और आटा नूडल्स का नमूना लिया। इसी तरह कैंपियरगंज के ही चौमुखा से सोनपापड़ी का भी नमूना लिया है। सभी को जांच के लिए लैब भेजा गया है। अभी इनकी रिपोर्ट आनी है।
संदेह पर ही टीम लेती है नमूने
खाद्य सुरक्षा अधिकारी यूं तो कई दुकानों का निरीक्षण करते हैं मगर नमूने उन्हीं खाद्य पदार्थों के लेते हैं जिनमें गड़बड़ी की आशंका होती है। एक दुकान में कई तरह के खाद्य पदार्थ होते हैं। इसी तरह मिठाई की दुकानों में भी तमाम तरह की मिठाई होती है। ऐसे में अगर सभी के नमूने लिए जाएं तो फेल होने वाले नमूनों की संख्या में और इजाफा हो सकता है। मगर यह संभव नहीं है क्योंकि प्रदेश में जांच करने के लिए लैब और वहां मौजूद कर्मचारियों की संख्या भी सीमित है। बड़े ब्रांड में गड़बड़ी की आशंका कम होने पर टीम ज्यादातर छोटी कंपनियों और दुकानों पर बनने वाले सामानों के ही नमूने लेती है।
जब तक रिपोर्ट आती खप जाता है मिलावटी सामान
2013 में लागू हुए नए एक्ट में व्यापारियों को काफी सहूलियत मिल गई है। संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग अब सिर्फ नमूने लेकर जांच के लिए भेज सकता है। जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक संबंधित व्यापारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती। अधिकतम 15 दिन में जांच रिपोर्ट तैयार करने का प्रावधान है मगर संसाधनों की कमी से कोई भी रिपोर्ट चार से छह महीने के भीतर नहीं आती। ऐसे में जब तक किसी खाद्य पदार्थ में गड़बड़ी की जानकारी होती है, संबंधित दुकान या शापिंग कांप्लेक्स की रैक से सामान बिक चुका रहता है। ऐसे में ये लापरवाही कभी भी खतरनाक साबित हो सकती है।
मिलावट को लेकर विभाग सतर्क है। दुकानों का निरंतर निरीक्षण किया जा रहा है। अनुभव के आधार पर जिस खाद्य पदार्थ में गड़बड़ी की आशंका होती है, उसी का नमूना लिया जाता है। यही वजह है कि जांच के लिए भेजे जाने वाले नमूनों की जब रिपोर्ट आती है तो उसमें ज्यादातर नमूने फेल मिलते हैं। इनमें भी अद्योमानक और मिथ्या छाप यानी पैकेजिंग में गड़बड़ी ज्यादा पाई जाती है। इन सभी पर कार्रवाई की जा रही है। सैकड़ों लोगों पर लाखों रुपये का जुर्माना लग चुका है।
- अजीत कुमार, अभिहीत अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग
खुद भी करा सकते हैं जांच: सीएफओ
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि कोई भी व्यक्ति अपने घर में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की जांच करा सकता है। इसके लिए एक हजार रुपये फीस जमा करनी होगी। विभाग संबंधित के वहां से नमूने एकत्रित करेगा और फिर जांच के लिए उसे लैब भेजेगा। जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित व्यक्ति की पहचान पर उस दुकान से संबंधित ब्रांड के खाद्य पदार्थ का फिर नमूना लेकर उसे जांच के लिए भेजा जाएगा। उसमें गड़बड़ी मिलने पर संबंधित दुकानदार, कंपनी के अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
मिलावट पर यहां करें शिकायत
अभिहीत अधिकारी अजीत कुमार-9450725235
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल कुमार राय-9454468595