गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर में चल रही योग आध्यात्मिक शैक्षिक कार्यशाला में ताराचंद महा विद्यालय के प्राचार्य डॉ.वाईपी कोहली ने कहा कि हमारे ऋषियों ने योग को विज्ञान माना है। योग की एक क्रमबद्ध पद्धति है, जो विज्ञान के सभी अवयवों को समाहित किए हुए है। इससे अनेक प्रकार के रोगों को दूर किया जा सकता है। योग के आसन और प्राणायाम के अनेक तरीके हैं, जो रोगों को दूर करने में सहायक होते हैं।
उन्होंने कहा कि सर्वांग आसन के द्वारा इस्नोफिलिया, गोरक्षासन के द्वारा स्वप्नदोष को दूर किया जा सकता है। योग विज्ञान के माध्यम से ही हमारे पूर्वजों ने दुनिया में भारत को विश्व गुरु बनाया था। आज हम योग के माध्यम से उस वैभव को प्राप्त कर सकते हैं। प्रधानमंत्री इसके लिए प्रयास कर रहे हैं, फि र भी जब तक इसे पाठ्यक्रम में नहीं शामिल किया जाएगा, तब तक योग को उचित स्थान नहीं मिलेगा।
उड़ीसा से आए योगी शिवनाथ महाराज ने कहा कि आसन एवं प्राणायाम के अभ्यास के बाद महामुद्रा की साधना की जाती है। मुद्रा की कुछ विधियों का अभ्यास आसन और प्राणायाम के साथ स्वत: करना पड़ता है। मुद्रा की उच्चतर अपेक्षाकृत कठिन विधियां उच्चतर उपलब्धियों के लिए निर्धारित है।
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शिक्षा राष्ट्रीय विकास का सबल साधन : शाही
गोरखपुर। ‘हम और हमारी संस्था’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में डा. राजशरन शाही ने कहा कि शिक्षा राष्ट्रीय विकास का सबल साधन है। राष्ट्रीय विकास का अर्थ सामाजिक व सांस्कृतिक विकास है। शिक्षा के माध्यम से स्वावलंबी, संस्कृतनिष्ट, राष्ट्रभक्त नागरिक तैयार करना महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद का उद्देश्य है। शिक्षा परिषद की स्थापना के पीछे महंत दिग्विजय नाथ का उद्देश्य हीनता के भाव से भारत की भावी पीढ़ी को मुक्त कर राष्ट्रीय मान बिंदुओं के प्रति गौरव के भाव विकसित करना था।