गोरखपुर। गोरखपुर यूनिवर्सिटी के जंतु विज्ञान विभाग मेें शोध का दायरा बढ़ाने के लिए प्रस्तावित एनिमल हाउस फाइलों में ही सिमट गया है। दो साल पहले जमीन चिह्नित कर विकास समिति की ओर से पौने दो करोड़ रुपये की मंजूरी मिलने के बाद टेंडर भी निकाला जा चुका है। इसके बाद भी अनदेखी के चलते यह महत्वाकांक्षी योजना मूर्तरूप नहीं ले सकी। भविष्य में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के ग्रेड निर्धारण में एनिमल हाउस न होना यूनिवर्सिटी के सामने बड़ी बाधा बन सकती है।
यूनिवर्सिटी की स्थापना के साथ ही जंतु विज्ञान विभाग के लिए एक एनिमल हाउस बनाया गया था। लंबे समय से उसका उपयोग भी किया गया। लेकिन समय और जरूरत के हिसाब से इसका उच्चीकरण नहीं हो सका। जिसके चलते ज्यादातर शिक्षकों ने अपनी प्रयोगशाला में ही अस्थायी एनिमल हाउस बना लिया लेकिन बेहतर शोध के लिए मुफीद माहौल नहीं बन सका। बायो टेक्नोलॉजी और माइक्रो बायोलॉजी विभाग में शोधरत विद्यार्थियों के लिए दिक्कतें आने लगी हैं। एनिमल हाउस के निर्माण के लिए दो वर्ष पहले टेंडर निकाला गया, लेकिन एक ही आवेदन के चलते इसे निरस्त करना पड़ा। इसके बाद एक कार्यदायी संस्था से भी अनुबंध को लेकर वार्ता हुई लेकिन जिम्मेदारों की पहल न होने से योजना लटक गई।
एनिमल हाउस के लिए पौने दो करोड़ रुपये बजट और जमीन चिह्नित है। टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई थी। कोशिश की जाएगी कि इसका निर्माण जल्द हो सके ताकि शोध करने वाले विद्यार्थी इसका लाभ ले सकें।
- प्रो. अजय कुमार सिंह, विभागाध्यक्ष जंतु विज्ञान विभाग
ऐसा होगा एनिमल हाउस का स्वरूप
एनिमल हाउस के छह कमरों में एक कमरा कोल्ड रूम के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। जबकि एक-एक कमरे में शोध के लिए एल्बिनो रैट और कीट रखे जाएंगे। बाकी कमरों का इस्तेमाल शोध संवर्धन (कल्चर) के लिए किया जाएगा। भवन के दोनों ओर दो छोटे-छोटे तालाब बनाए जाएंगे, जिसमें एक में शोध के लिए जरूरी मछलियों की प्रजाति रखी जाएगी जबकि दूसरे में घोंघा पालन किया जाएगा। अगले हिस्से में एक पॉली हाउस बनाया जाएगा, जिसमें कीट पंतगों पर शोध के लिए जरूरी पौधों को संरक्षित किया जाएगा।