गोरखपुर। इलाज का खर्च सस्ता किए जाने के बाद दिल और घुटने की सर्जरी कराने वाले जिले के कुछ लोगों से बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वीडियो कांफ्रेंसिंग से बात करनी थी। लेकिन यह संभव नहीं हो सका। घुटना प्रत्यारोपित कराने वाले लोगों तो बुलावा ही नहीं भेजा गया। जबकि दिल की सर्जरी कराने वाले सिर्फ दो लोग ही मौजूद रहे।
जिले के सात लोगों को कलेक्ट्रेट के कांफेंसिंग हाल में पीएम से बात के लिए आना था। लेकिन स्टेंट बदलवाने केवल दो ही लोग मौके पर मौजूद रहे। इस बारे में सीएमओ श्रीकांत तिवारी का कहना है कि बुधवार रात को ही प्रधानमंत्री से बात करने वाले लोगों की सूची आ गई थी, इसमें गोरखपुर के लोग शामिल नहीं थे। इसलिए सभी लोगों को नहीं बुलाया गया। वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान पीएम ने देश के अन्य जगहों के लोगों से बात की। बताया कि सरकार की मंशा है कि इलाज सस्ता और कारगर हो।
करोड़ों रुपये का हुआ लाभ
पीएम मोदी ने कहा कि प्रतिवर्ष देश में एक से डेढ़ लाख लोग घुटना प्रत्यारोपित कराते हैं। सस्ते इलाज की योजना से प्रतिवर्ष 1500 करोड़ रुपये की बचत होगी। घुटना प्रत्यारोपित कराने में आने वाला खर्च 70 प्रतिशत तक कम हुआ है। जबकि स्टैंट लगवाना पहले की तुलना में 85 प्रतिशत तक सस्ता हो गया है
2025 तक टीबी मुक्त होगा भारत
पीएम मोदी ने कहा कि 2030 तक पूरे विश्व से टीबी के खात्मे का लक्ष्य है। लेकिन भारत इस बीमारी से पांच साल पहले 2025 तक पूरी तरह मुक्त होने के लिए संकल्पित है।
डेढ़ लाख स्वास्थ्य सेवा केंद्र खोले जाएंगे
पीएम मोदी ने बताया कि देश के हर कोने में डेढ़ लाख स्वास्थ्य सेवा केंद्र खोले जाएंगे। हर माह की नौ तारीख को इन केंद्रों पर प्रसूताओं का मुफ्त स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।
योग दिवस को बनाएं राष्ट्रीय पर्व
पीएम ने कहा कि प्रत्येक 21 जून को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय योग दिवस को राष्ट्रीय पर्व की तरह मनाया जाना चाहिए। योग को जीवन का हिस्सा बनाएं। बोले, अगर देश के 125 करोड़ देशवासी स्वस्थ रहेंगे तो देश स्वस्थ रहेगा।
मोदी जी से मन की बात करने की बहुत इच्छा थी। लेकिन लगता है समय के अभाव में उन्होंने शहर के लोगों से बात नहीं की। : अमूल्य शंकर, बेतियाहाता
प्रधानमंत्री के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग से अपने अनुभव साझा करना विशेष मौका होता। पीएम से बात होगी इसी उम्मीद के साथ सुबह ही कैंपियरगंज से आ गया था। उनसे बात नहीं हो सकी निराश हूं। : वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, कैंपियरगंज