गोरखपुर।
नौसड़ में सड़क धंसने से जहां कालेसर होते हुए लखनऊ का सीधा रास्ता बंद हो गया, वहीं मलौनी बांध के रिसाव के बीच लहसड़ी में भी सड़क धंस गई। इस रोड पर भी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। आसपास के लोग रिसाव रोकने में जुटे हैं।
मलौनी बांध कई गांवों को ही नहीं बल्कि गोरखपुर शहर के बड़े हिस्से को भी राप्ती के उफान से बचाव देता है। बाढ़ का कहर बढ़ते ही जहां लहसड़ी व बांध की नजदीकी आबादी के तमाम लोग बंधे पर जुट गए, वहीं ट्रांसपोर्टनगर से लेकर रुस्तमपुर, आजाद चौक, तारामंडल रोड की कॉलोनी के लोग रह-रह कर राप्ती के उफान और बांध की स्थिति जानने में लगे हैं। इस दौरान बांध पर गई जगह से रिसाव से लोगों की चिंता बढ़ा दी। नजदीकी लोग कई दिन से रेत के बोरे, बजरी आदि भरकर रिसाव थामने में जुटे थे कि इसी बीच लहसड़ी में सड़क धंसने से अफरा तफरी फैल गई।
धंसे हिस्से से गाड़ियों की आवाजाही रोककर रिसाव और कटान से बचाव की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।
धंसी सड़क पर हादसे से बची व्यापारी की कार
नौसड़ रोड पर आते समय बाल-बाल बचे
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। गीडा-कालेसर-नौसड़ रोड पर कार से आ रहे होटल व्यापारी शमशाद उर्फ भोला इस सड़क के धंसने के प्रत्यक्षदर्शी बन गए, हालांकि एकाएक सड़क धंसने से वह हादसे से बाल-बाल बचे भी।
शमशाद के मुताबिक बुधवार को शाम करीब साढ़े सात बजे लखनऊ से आते वक्त गोरखपुर का सीधा रास्ता खुला देखकर अपनी कार इसी रोड पर बढ़ा दी थी। नौसड़ चौराहे से तीन 300 मीटर दूर थे, तभी सामने की सड़क धंस गई। अचानक ब्रेक लगाकर कार रोकने में कामयाबी मिल गई और बच गए। वापसी कर फोरलेन हाईवे से बाघागाड़ा होकर शहर में दाखिल हुए।
प्रभावित क्षेत्र के रहने वाले शमशाद अहमद का कहना है कि प्रशासन की तरफ से बड़ी लापरवाही की जा रही है। रिसाव की वजह से सड़क तीन जगह से धंसी है। इसे बंद करने की जहमत सिंचाई विभाग या फिर प्रशासन के अफसर नहीं उठा रहे हैं। नौसड़ बंधा जर्जर है। ऐसे ही रिसाव बना रहा तो खतरा और बढ़ जाएगा।