गोरखपुर।
लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड में कार्यरत बाबू को आखिर निलंबित करना पड़ता। कैशियर के रूप में कार्य करते हुए टेंडर की बिक्री से मिले रुपये को खजाने की जगह पाकेट में रख लिया था। शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई थी। जांच निर्माण खंड-तीन के अधिशासी अभियंता ने की। जांच रिपोर्ट मिलने के 18 दिन बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।
बता दें कि प्रांतीय खंड में कार्यरत बाबू नंदलाल चौधरी को कैशियर का चार्ज अधिशासी अभियंता ने दिया था। कहा जा रहा है कि उस दौरान उसने जो भी टेंडर बेचे उसका धन सरकारी खजाने में जमा करने की जगह खुद रख लिया। इसकी जानकारी तत्कालीन अधिशासी अभियंता को हुई तो उन्होंने अपने स्तर से जांच पड़ताल शुरू की। जो रिकार्ड उनके हाथ लगा उसमें 1.61 के करीब टेंडर फॉर्म का धन जमा नहीं किया गया था। इस पर उन्होंने इसकी लिखित शिकायत मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता से कर निलंबित करने को कहा। इस संबंध में अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड अशोक कुमार ने कहा कि निलंबन की कॉपी मिली है, अभी तक उसे देखा नहीं है।