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हर व्यक्ति का जीवन, अधिकार न्यायपालिका में सुरक्षित: मुख्य न्यायाधीश

Sat, 09 Mar 2019 11:57 PM IST
ajay Kumar अमर उजाला/गाोरख्ापुर
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर । - फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर ने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन की सुरक्षा और उसके अधिकारों के प्रति न्यायपालिका सजग है। न्यायालय जाए बिना व्यक्ति का अधिकार सुरक्षित रहे इसके लिए न्यायपालिका सतत प्रयत्नशील है। अब न्यायालय जाने के लिए पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती है। इस दिशा में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण काम कर रहे हैं। उचित मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
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सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में लगे वृहद विधिक सहायता शिविर का उद्घाटन करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हर व्यक्ति को सफाई के प्रति जागरूक रहना होगा। कुछ सफाई कर्मियों से ही मकसद पूरा नहीं होगा। सबको मिलकर एक साथ आगे बढ़ना होगा। पांच साल से स्वच्छता अभियान चल रहा है, फिर भी गंदगी देखने को मिल जाती है। यातायात नियमों का उल्लंघन गोरखपुर में भी देखा है। हम लोग ऐसे लोकतंत्र के नागरिक हैं जहां विधि का शासन है। जस्टिस डिलिवरी सिस्टम केवल न्यायपालिका का हिस्सा नहीं हैं। इसके लिए सबको जागरूक होना होगा। शिविर में बड़ी संख्या में महिलाएं आई हैं। यह देखना सुखद है। जस्टिस माथुर ने अलग-अलग विभागों के 34 स्टॉल को भी देखा। लाभकारी योजनाओं की जानकारी ली।

प्रशासनिक न्यायमूर्ति डीके अरोड़ा ने विधिक सेवा प्राधिकरण के बारे में विस्तार से बताया। कहा कि न्याय से कोई वंचित न हो इसकी जिम्मेदारी प्राधिकरण की है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव ज्योत्सना शर्मा ने कहा कि सर्विस प्रोवाइडर को जागरूक करना, पीड़ितों को सशक्त बनाना और जन सामान्य को न्याय दिलाना प्राधिकरण का प्रमुख काम है। जनपद न्यायाधीश गोविंद बल्लभ शर्मा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इससे पहले एक पुस्तिका का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का संचालन न्यायाधीश अशोक कुमार सिंह ने किया। इस मौके पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के कार्यपालक अध्यक्ष जस्टिस विक्रमनाथ, एडीजे मनोज कुमार राय, यासमीन अकबर, सुरेंद्र सिंह, मंडलायुक्त अमित गुप्ता, जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन, एसएसपी डॉ. सुनील कुमार गुप्ता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वीरेंद्र शाही, मंत्री अजय कुमार शुक्ल, रत्नाभ पति त्रिपाठी, केके त्रिपाठी, रविंद्र श्रीवास्तव, राम रूप त्रिपाठी त्रिपाठी मौजूद रहे।
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फिर साथ-साथ 15 जोड़े

गोरखपुर। दीवानी कचहरी पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश देवेंद्र सिंह और अपर जिला जज कुमार प्रशांत का प्रयास रंग लाया है। शनिवार को 15 जोड़े फिर एक साथ रहने को राजी हो गए। सबके मामले लंबे समय से पारिवारिक न्यायालय में लंबित थे। प्रधान न्यायाधीश की मौजूदगी में जोड़ों ने एक-दूसरे को माला पहनाई, फिर एक साथ रहने की कसम खाई।
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