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कर्मभूमि पर याद किए गए कथा सम्राट

Wed, 01 Aug 2018 01:50 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
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कलाकारों ने मुंशी प्रेमचंद के नाटक का मंचन किया
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गोरखपुर। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उनकी कर्मभूमि गोरखपुर ने उन्हें शिद्दत से याद किया। गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में उनके कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर चर्चा हुई तो प्रेमचंद पार्क में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण को तांता लगा रहा। इप्टा, रंगाश्रम और युवा संगम के कलाकारों ने उनकी कहानियों का मंचन कर श्रद्धांजलि दी तो अलख कला समूह ने दास्तानगोई से याद किया।

मुंशी जी के लेखन में है सामाजिक यथार्थ : डॉ. विश्वनाथ तिवारी

हजारी प्रसाद द्विवेदी कहते थे, अगर उत्तर भारत की सभ्यता एवं संस्कृति की प्रमाणिक जानकारी प्राप्त करनी है तो प्रेमचंद के कृतित्व का अनुशीलन करना होगा। गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर आयोजित विचार गोष्ठी में साहित्य अकादमी के अध्यक्ष आचार्य विश्वनाथ तिवारी ने इस टिप्पणी की याद दिलाई। मुख्य अतिथि पद से उन्होंने कहा, प्रेमचंद ने अपने लेखन में सामाजिक यथार्थ का सदैव ध्यान रखा। वह ऐसे लेखक थे जिनमें सामाजिक लेखन की तड़प थी। वे अपनी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ की पृष्ठभूमि को चित्रित करते थे। उनमें जितनी तड़प लेखन की थी उतनी ही अखबारनवीस बनने की। अखबार पढ़ने के लिए तीन-चार किलोमीटर तक चले जाते क्योंकि खरीदने के लिए पैसे नहीं होते थे। अध्यक्षीय उद्बोधन विभागाध्यक्ष प्रो. चित्तरंजन मिश्र ने किया। संचालन प्रो. अनिल कुमार राय ने किया। इस मौके पर प्रो. आद्या प्रसाद द्विवेदी, प्रो. मंजू त्रिपाठी, प्रो. दीपक प्रकाश त्यागी, प्रो. कमलेश कुमार गुप्त, डॉ. प्रेमव्रत तिवारी, एमएलकेपीजी कॉलेज बलरामपुर के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रेश्वर पांडेय, हरिशरण पति त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

जीवटता का सबक सिखा गए ‘रंगीले बाबू’

बेटी के पति की मौत, फिर बारात निकलने से ठीक पहले बेटे का निधन। मास्टर साहब अंदर से टूट जाते हैं। ऐसे में रसिक लाल उनके भीतर नवजीवन का संचार करते हैं। इन दोनों की वार्ता आंखें तो भिगोती पर परेशानियों का हंसते हुए मुकाबला करने का पाठ भी सिखाती है। यही है नाटक ‘रंगीले बाबू’। इप्टा गोरखपुर इकाई के कलाकारों ने इसका मंचन प्रेमचंद पार्क में किया। कहानी का नाट्य रूपांतरण एवं निर्देशन डॉ. मुमताज खान ने किया। एस रफत ने रसिक लाल व विनोद चंद्रेश ने मास्टर साहब को मंच पर जीवंत कर दिया। रीना श्रीवास्तव, सोनी निगम, प्रियंका अग्रहरि, आसिफ सईद, संजय सत्यम, शैलेंद्र निगम और मृत्युंजय शंकर ने भी अपनी भूमिकाओं से न्याय किया। इससे पहले अलख कला समूह के कलाकारों ने दास्तानगोई कार्यक्रम में प्रेमचंद की कहानियों का रोचक ढंग से पाठ किया। विचार गोष्ठी में अनिल राय, मनोज सिंह आदि वक्ताओं ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा की।
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पूस की रात, मुफ्त का यश और कफन का मंचन

रंगाश्रम परिवार ने प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। फिर कलाकारों ने ‘पूस की रात’ का मंचन किया। संस्था के सह सचिव कल्याण सेन के नेतृत्व में रंग जुलूस निकाला गया। तिराहे पर नाटक ‘मुफ्त का यश’ का मंचन हुआ। यहां से जुलूस कार्मल स्कूल के सामने अर्धनिर्मित प्रेक्षागृह पहुंचा जहां गोष्ठी हुई। इसमें केसी सेन, दीप शुक्ल, रज्जब अंसारी, अनुराग, अजय, बलवंत, आदित्य, नीतिका, आकाश, समीर, सूरज, विजय सिंह, अशरफ, सूरज, मुकेश, मनोज आदि शामिल रहे। संचालन कल्याण सेन ने किया।
चित्रगुप्त मंदिर सभा की ओर से अध्यक्ष अनूप कुमार श्रीवास्तव और मंत्री अखिलेंदु कुमार एडवोकेट के नेतृत्व में मुंशी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण हुआ। शाम को चित्रगुप्त मंदिर परिसर में जयंती कार्यक्रम के तहत युवा संगम के कलाकारों ने नाटक ‘कफन’ का मंचन किया। परिकल्पना एवं निर्देशन पीयूष कांत अलग की थी। इस दौरान भारतेंदु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रवि शंकर खरे तथा मेधावी विद्यार्थियों का अभिनंदन भी किया गया।
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जरूरतमंदों में बांटी खाद्य सामग्री

‘प्रयास-एक परिवर्तन का’ की ओर से प्रेमचंद जयंती पर चंद्रलोक कुष्ठाश्रम में सभी बच्चों के बीच भोजन, रस्क, फल व बिस्किट प्रदान किया गया। एसडी विश्वास ने कुुष्ठाश्रम के मुखिया कुंदरू के साथ सामग्री का वितरण किया। इसके अलावा रिक्शा, आटो व ठेला चालकों व अन्य जरूरतमंदों को भी वितरित किया गया। यह जानकारी राष्ट्रीय संयोजक प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने दी
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