लोकायुक्त में भ्रष्टाचार की शिकायत करने का तरीका बताते सचिव आरएन पांडेय।
लोकायुक्त कुप्रशासन और भ्रष्टाचार के मामलों की ही सुनवाई करते हैं। 40 वर्ष से लोकायुक्त लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और कुप्रशासन की शिकायतों का निराकरण कराते हुए दोषी पर कार्रवाई के लिए सक्षम प्राधिकारी को भेजते हैं। लोकायुक्त के दायरे में आने वाली शिकायतों की सुनवाई घटना के समय से लेकर पांच वर्ष की समय सीमा के अंदर की जाती है। शिकायत करने के लिए 2000 रुपये की प्रतिभूति तय है, जो जांच में शिकायत सही मिलने पर वापस कर दी जाती है। वहीं फर्जी शिकायत पर शिकायतकर्ता पर 50 हजार का जुर्माना और प्रतिभूति जब्त करने का प्रावधान है।
ये बातें लोकायुक्त के सचिव आरएन पांडेय ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी के संवाद भवन में आयोजित समाधान दिवस एवं गोष्ठी में कहीं। उन्होंने बताया कि फर्जी शिकायत पर क्रिमिनल केस भी दर्ज करने का प्रावधान है। बताया कि लोक सेवक किसी भी लोक सेवक के विरुद्ध शिकायत नहीं कर सकता है। साथ ही लोक सेवक प्रमोशन, नियुक्ति आदि के बारे में भी शिकायत नहीं कर सकता है। गोष्ठी में अपर जिलाधिकारी नगर रजनीश चंद, एसपी क्राइम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान समेत आमलोग भी मौजूद थे।
ऐसे करें शिकायत
सचिव आरएन पांडेय ने बताया कि लोकायुक्त में शिकायत करने के लिए तीन प्रतियाें में निर्धारित प्रारूप भरकर कोई भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। प्रारूप में परिवादी का नाम, पिता का नाम, व्यवसाय, पता, जिसके विरुद्ध शिकायत है उसका नाम-पदनाम, परिवाद का कारण, निर्धारित फीस, शपथ पत्र और शिकायत का विवरण देना होता है।