गोरखपुर।
ऑनलाइन शॉपिंग के दीपावली ऑफर लोगों को खूब रास आ रहे हैं। गृहणियां हों या युवा, ऑनलाइन शॉपिंग का जादू सभी के सिर चढ़कर बोल रहा है। दिवाली ऑफर और डिस्काउंट की भरमार से इस ओर लोगों रुझान बढ़ा है। खास तौर पर मोबाइल, लैपटॉप, कपड़े, जूते, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान के आर्डर धड़ल्ले से दिए जा रहे हैं। इसका असर पारंपरिक बाजार पर भी पड़ रहा है। हालांकि ऑनलाइन शॉपिंग करते समय सावधानी भी जरूरी है वरना आप साइबर ठगी के शिकार हो सकते हैं।
मोबाइल की बिक्री पर पड़ा असर
मोबाइल शोरूम के मालिक बॉबी ने बताया कि ऑनलाइन शॉपिंग के कारण मोबाइल की बिक्री पिछले दो साल के मुकाबले इस साल काफी कम है। ऑनलाइन शॉपिंग में ग्राहक अपनी रेंज के हिसाब से 100 से ज्यादा मोबाइल देखता है और फिर एक चुनता है। दाम भी बाजार के मुकाबले 10 से 30 फीसदी तक कम हैं। हालांकि, इससे वह निराश नहीं हैं। जिन ग्राहकों को तत्काल मोबाइल चाहिए वो शॉप से ही लेते हैं। कई लोग अब भी ऑनलाइन के बजाए सीधे दुकानों से खरीदारी पर भरोसा करते हैं।
ऑनलाइन शॉपिंग से बढ़ी प्रतिस्पर्धा
कपड़े के दुकानदार अर्जुन बताते हैं कि ऑनलाइन शॉपिंग से प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। इसका असर बिक्री पर भी पड़ा है। ऑनलाइन शॉपिंग में भारी डिस्काउंट के कारण ग्राहक यहां भी उसी रेट में कपड़ों की मांग करते हैं। बर्तन व्यवसायी गोविंद भी कहते हैं कि कई ग्राहक ऑनलाइन शॉपिंग का रेट बताकर मोलभाव करते हैं। कई ग्राहक ऑनलाइन शॉपिंग के ऑफर बताकर बिना बर्तन खरीदे ही लौट जाते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक का मार्केट सिमटा
इलेक्ट्रिानिक सामान की शॉप चलाने वाले राजकुमार गुप्ता ने बताया कि एलईडी टीवी, फ्रिज, गीजर आदि पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है लेकिन किचन के इस्तेमाल वाले सामान की सेल कम हो गई है। इलेक्ट्रॉनिक के एक अन्य दुकानदार शैलेश पांडेय ने बताया कि अब लोग ऑनलाइन सर्च कर लैपटॉप के बारे में जानकारी जुटाते हैं, फिर वहीं से खरीद भी लेते हैं। पहले धनतेरस पर लैपटॉप खरीदने के लिए भीड़ उमड़ती थी लेकिन दो वर्ष से ऐसा नहीं हो रहा।
बड़े धोखे इस शॉपिंग में
लखनऊ साइबर सेल में नौ नवंबर 2016 से 14 जनवरी 2017 के बीच 185 मामले दर्ज किए गए थे। ये वो लोग थे जो दिवाली के त्योहार पर ऑनलाइन शॉपिंग की चाह में साइबर ठगों के जाल में फंस गए। लिहाजा इस बार दिवाली पर ऑनलाइन खरीदारी करते समय सावधानी बरतनी जरूरी है। लुभावने ऑफर का सहारा लेकर 20 से ज्यादा फर्जी वेबसाइटों के जरिये साइबर ठगों ने लोगों के खाते खाली करने का जाल बिछा रखा है।
ट्रेस करना मुश्किल
आईटी एक्सपर्ट के मुताबिक फर्जी वेबसाइट मात्र पांच से दस हजार में बन जाती है। सायबर ठग कुछ ही दिनों में वेबसाइट और होस्ंिटग का पता बदल लेते हैं। अगर पुलिस की साइबर सेल इन्हें ट्रेस करने की कोशिश भी करती है तो इनका सर्वर विदेश में दिखाता है। इस तरह की साइट्स अन्य कंपनियों से 20 से 30 प्रतिशत ज्यादा डिस्काउंट देती हैं। ज्यादा डिस्काउंट के लालच में फंसकर ग्राहक ठगी के शिकार हो जाते हैं।
यह रखें ध्यान
आईटी एक्सपर्ट साइंटिस्ट अभिनव मिश्र ने बताया कि पहले तो शॉपिंग साइट की विश्वसनीयता जांच लेनी चाहिए। हो सकता है कि वेबसाइट मिलते-जुलते नाम से ग्राहकों को झांसा देने के लिए बनाई गई हो। कार्ड की डिटेल साइट पर सेव न करें। हमेशा ई-कॉमर्स वेबवाइट का यूआरएल टाइप करें। खरीदारी व्यक्तिगत कंप्यूटर और मोबाइल से करनी चाहिए। कोशिश करनी चाहिए कि एक ही कार्ड का इस्तेमाल करें, ताकि खाता चेक करते समय परेशानी न हो और गड़बड़ी तुरंत पता चल जाए। डेबिट कार्ड की जगह क्रेडिट कार्ड से भुगतान करें, क्योंकि बैंक क्रेडिट कार्ड के साथ गारंटी देता है।