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जेल में बंदी से मिले जर्मन दूतावास के अफसर

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गोरखपुर। तीन साल से तस्करी के आरोप में जेल में बंद जर्मन नागरिक से बुधवार को जर्मन दूतावास के अधिकारी ने मुलाकात की। अधिवक्ता के साथ पहुंचे दूतावास के काउंसलर ने बंदी से उसका हाल जाना और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी ली। कुछ दिनों पहले बंदी की पत्नी ने पति की रिहाई के लिए जर्मन दूतावास से मदद मांगी थी।
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31 अक्टूबर 2014 को सोनौली बॉर्डर से जर्मन नागरिक मैनफ्रेंड बैरेंड भारत में प्रवेश कर रहा था। तलाशी में एसएसबी को उसके पास चार किलोग्राम चरस मिला, जिसे बैग में छिपाकर वह नेपाल से गोवा ले जाने के लिए निकला था। जर्मनी के सजसेन के सिरायू लेसिंग स्ट्रीट निवासी मैनफ्रेंड ने पूछताछ में बताया था कि भैरहवा के एक होटल से उसने एक लाख 20 हजार रुपये में चरस खरीदी थी। एक साल तक महराजगंज जेल में रहने के बाद उसे एक अक्टूबर 2015 को गोरखपुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया। जानकारी होने पर उसकी पत्नी जर्मनी से गोरखपुर आईं और शाहपुर इलाके में किराए पर कमरा लेकर मुकदमे की पैरवी करने लगीं। पत्नी के प्रयास से 31 मई 2017 को मैनफ्रेंड को कोर्ट ने जमानत देते हुए पांच-पांच लाख रुपये के दो जमानत पेश करने का आदेश दिया। भागदौड़ के बाद मैनफ्रेंड की पत्नी ने दो जमानतियों के नाम दिए, जिसमें एक फर्जी निकल गया। इसके बाद कोर्ट ने दूसरे जमानतदार के एवज में पांच लाख रुपये जमा कराने का आदेश दिया था। इसके लिए उन्होंने जर्मन दूतावास से मदद मांगी, जिसके बाद अधिकारी सक्रिय हुए। जेलर आरके सिंह ने बताया कि दूतावास के अधिकारी ने आकर बंदी की जानकारी ली है। दूतावास को उसकी डिटेल भी भेजी गई है।
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