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बाढ़ बेजान, जोखिम में जान

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गोरखपुर।
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तबाही मचाकर बेजान हुई बाढ़ ने त्रासदी की जो इबारत लिखी, वह अब मौत की कहानी बनने लगी है। पानी उतरने के साथ आई बीमारियों की बाढ़ में स्वास्थ्य विभाग के दावे बहने लगे हैं। संग्रामपुर उनवल में डायरिया न सिर्फ जानलेवा बनी, बल्कि 100 से ज्यादा की जान जोखिम में डाले हुए है। ये तो महज बानगी है, बाढ़ के बाद अधिकतर प्रभावित गांवों का हाल कमोबेश यही है। हालांकि उनवल की तरह इन गांवों में संक्रामक बीमारियों से अभी जान तो नहीं गई, लेकिन हालात तसल्लीबख्श भी नहीं हैं। बचाव व इलाज के नाकाफी इंतजाम के बीच डायरिया, सर्दी, खांसी, बुखार समेत त्वचा से जुड़ी बीमारियां आपदा के मारों के लिए दोहरी मार बनकर फैलने लगी हैं।

अनसुनी की खतरे की घंटी तो जानलेवा हुई डायरिया
स्वास्थ्य विभाग के अफसर अगर समय रहते चेते होते तो शायद संग्रामपुर उनवल में डायरिया किसी की जान न ले पाती। गांव में डायरिया फैलने की जानकारी जिम्मेदार अफसरों को हुई, लेकिन वो लापरवाह बने रहे। जब बीमारी मौत के मातम में तब्दील हुई, तब अफसरों की नींद टूटी।
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जिला संक्रामक रोग अस्पताल का रिकॉर्ड बताता है कि गांव में डायरिया से भयावह होते हालात के बाबत अफसर एक दिन पहले ही जान चुके थे। शनिवार को संक्रामक रोग अस्पताल में नौ मरीज भर्ती हुए थे। इनमें तीन उनवल एडिशनल पीएचसी से रेफर होकर आए थे। शीला (34), अंजू सैनी (18) और शालिनी (20) की हालत खराब होने पर पीएचसी से उन्हें अस्पताल भेजा गया था। कई और मरीज भी दो शैय्या वाले अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे थे। इसके बाद भी जिम्मेदार संग्रामपुर उनवल के हालात को लेकर गंभीर नहीं हुए। नतीजा रहा कि अगले दिन डायरिया ने जानलेवा रूप ले लिया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसर हरकत में आए। सीएमओ डॉ. रवींद्र कुमार ने आननफानन प्रभावित गांव का दौरा किया और दवाओं का वितरण कराया।

मरीजों से भरा संक्रामक रोग अस्पताल
संग्रामपुर उनवल के मरीजों से संक्रामक रोग अस्पताल भर गया है। सोमवार सुबह उनवल की रविता देवी, गंगा देवी, पुष्पा, संतोष चौरसिया, विनीता, सोमवारी देवी को अस्पताल में भर्ती किया गया। रविवार को भर्ती उनवल के कुछ मरीज पहले से ही यहां इलाजरत थे। सोमवार को उनवल के अलावा उत्तरी जटेपुर के अजल को भर्ती किया गया। साथ ही 10 बेड वाले इस अस्पताल में फोल्डिंग डालने की जरूरत आ पड़ी। सोमवार दोपहर 12 बजे तक अस्पताल में 12 मरीजों का इलाज चल रहा था। इनमें एक शहर का मरीज था तो बाकि उनवल के थे।

डूबकर उबरे गांवों से आ रहे डायरिया के मरीज
संक्रामक रोग अस्पताल में बीते तीन दिनों में आए मरीजों में कुछेक को छोड़ दें तो बाकी उन गांवों से आए जो बाढ़ में डूबकर उबरे हैं। महेवा इलाके की सोना देवी, राधा शर्मा, ऋचा गौड़, खोराबार की मंजीता, सरदारनगर की गुड़िया, बड़गान की सीमा के अलावा उनवल से 17 मरीज चार दिनों में बाढ़ प्रभावित गांवों से अस्पताल पहुंचे। पीपीगंज, चौरीचौरा, चिल्लूपार, कैंपियरगंज, पिपरौली, पाली आदि क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने बाढ़ के बाद प्रभावित गांवों में डायरिया के मरीज बढ़ने की जानकारी दी।

इन गांवों के लोगों की सेहत पर मंडरा रहा खतरा
पिपरौली के बनौडा, रखौना, मंझरिया, बेलवाडाडी, गाडर, कैली, पीपीगंज के बाढ़ग्रस्त लक्ष्मीपुर ग्रामसभा के मछरिहा, करमहा, भैसाड़ी, परसौनी, बुढे़ली, मानीराम के सियारामपुर, परमेश्वरपुर, रामपुर, गोपालपुर, देवीपुर, बिशुनपुर, मानीराम, चौरीचौरा के दोआबा और चिल्लूपार के कछार में बसे गांवों में संक्रामक बीमारियों ने लोगों की धड़कनें बढ़ा रखी हैं। आसपास के अस्पतालों में इन दिनों इन गांवों के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। अधिकतर पेट दर्द, उल्टी-दस्त, बुखार, सर्दी, खांसी, दाद, खुजली के मरीज हैं।

पानी के बाद डॉक्टरों की कमी बनी परेशानी
पीपीगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फॉर्मासिस्ट के सहारे चल रहा है। फॉर्मासिस्ट रेनू चौहान बता रही हैं कि मरीज बढ़ गए हैं। औसतन 40 से 50 मरीज अस्पताल आ रहे हैं। अधिकांश खांसी, बुखार, दाद, खुजली और डायरिया के मरीज हैं। चार जनवरी से चिकित्सक की तैनाती न होने से गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जा रहा है। सामान्य मरीजों को जरूरी दवाओं के साथ ही क्लोरीन का भी वितरण किया जा रहा है। वहीं चिल्लूपार के कछार क्षेत्र के एकलौते प्राथमिक स्वास्थ केंद्र में डॉक्टर तो तैनात हैं लेकिन वह नदारद रहते हैं। सोमवार को फॉर्मासिस्ट संजय कुमार राय मरीज देखते मिले। साथ में वार्ड ब्वॉय राममिलन गुप्ता मौजूद थे।

आइसोलेशन वार्ड बस नाम का
संक्रामक रोग अस्पताल के सभी कमरे आइसोलेशन वार्ड के तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं। संक्रामक रोग के मरीज से दूसरों को संक्रमण न हो, इसके लिए यहां जरूरी इंतजाम होते हैं। सोमवार को मरीजों के ओवरलोड होने से इसके कमरे नाम के आइसोलेशन वार्ड रह गए। आलम यह था कि एक कमरे में दो मरीज भर्ती दिखे। इनके तीमारदार अलग से इन कमरों में मौजूद थे। इससे उन पर भी संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है।

पूजा की मौत याद कर सिहर रहीं सोमवारी
संग्रामपुर उनवल की डायरिया पीड़ित सोमवारी देवी (35) गांव में बीमारी के प्रकोप की बात करते ही उठ बैठीं। बोलीं, ‘का बताईं बाबू... हर घरवे में केहू न केहू बीमार बा। कइसे उल्टी-दस्त बगलिये के हंसमुख बिटिया पूजा के जान ले गइल, भुलात नाहीं बा।’
संक्रामक रोग अस्पताल के वार्ड नंबर 7 में अपने गांव की ही एक अन्य मरीज गुड़िया के साथ भर्ती सोमवारी देवी ने फोल्डिंग चारपाई पर दोनों हाथ टिका कर खुद को सहारा देते हुए जब ये कहा तो उनके चेहरे पर बीमारी से उपजी दहशत साफ नुमाया हो गई। बिटिया विनीता भी पूजा को याद कर उदास हो गई। बगल के बेड पर भर्ती गुड़िया भी गांव में हुई मौत की खबर पर दीवार का सहारा लेकर बैठ गईं। डायरिया जैसी बीमारी से इन मरीजों केे भीतर मौत का भय इस कदर तारी था कि विनीता सोमवारी देवी को अस्पताल लाते हुए रास्ते में बीमार हो गई थी। इलाज की व्यवस्था को लेकर विनीता, गुड़िया, रामपाल प्रसाद, सोमवारी देवी ने संतोष जताया, लेकिन उनवल एडिशनल पीएचसी पर जगह की कमी की समस्या बताई। इसी बीच विनीता बोली, ‘भगवान करें कि अब गांव में बीमारी से कोई जान न जाए।’
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दो एसीएमओ और पांच डॉक्टर कर रहे कैंप
सीएमओ डॉ. रवींद्र कुमार ने बताया कि रविवार को गांव में घर-घर घूमकर लोगों को दवाएं बंटवाईं। इसके साथ ही उनवल में दो सहायक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) समेत पांच डॉक्टर कैंप कर रहे हैं। पर्याप्त मात्रा में दवाओं की व्यवस्था की गई है। लोगों से छोटी मछलियां न खाने की अपील की है, साथ ही तहसील प्रशासन के सहयोग से क्षेत्र में छोटी मछलियों की बिक्री रुकवाई गई है।
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