गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर में चल रही श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन कथा व्यास स्वामी रामानंदाचार्य ने कहा कि श्रीराम भारत के प्रतीक हैं। श्रीराम धर्म के साक्षात स्वरूप हैं। वह भारत की संस्कृति के प्रतीक हैं। श्रीराम कथा भारत की कथा है। भारतीय संस्कृति की कथा है। यह भारत के घर-घर की कथा है। राजा दशरथ के घर भगवान की बाल लीला एक सामान्य घर की लीला है।
कथा को आगे बढ़ाते हुए कथा व्यास ने कहा कि राजा दशरथ के घर चार पुत्रों का जन्म नहीं निरंकार ब्रह्म का साक्षात सगुण अवतार हुआ था। भगवान ने अपनी बाल लीलाओं में समस्त अयोध्यावासियों को फंसा रखा था। अयोध्या में आठों सिद्धियों नव निधियों ने डेरा डाल रखा था। भगवान भास्कर भी अपने सारथी अरुण को रथ रोक देने का आदेश देकर भगवान की बाल लीलाओं का आनंद लेने लगे थे। बाल स्वरूप भगवान की भक्ति में देवता भी मगन थे।
कथा व्यास कहते हैं कि भगवान नारद ने नारद भक्ति सूत्रम् मेें दो मंत्र कथाश्रवण एवं संकीर्तन बताए हैं। भक्ति का यही आसान मार्ग है। भक्ति के इसी मार्ग पर भगवान श्रीराम के दर्शन को लालायित लोग अयोध्या के लिए चल पड़ते हैं। भगवान शिव बूढ़े ब्राह्मण के वेश में और कागभुुसुंडी उनके शिष्य का रूप धारण कर अयोध्या पहुंचते हैं। चौथे दिन की कथा के दौरान विकास जालान, संतोष अग्रवाल, अजय सिंह, विनोद कुमार राना, उर्मिला सिंह आदि मौजूद थीं।