शहर के पांच वार्डों के करीब 15 हजार घरों का गंदा पानी अब भी रामगढ़ ताल में बिना ट्रीटमेंट के गिर रहा है। एयरफोर्स से इंजीनियरिंग कॉलेज होते हुए महादेव झारखंडी तक के इन इलाकों के घरों से निकलने वाले गंदे पानी के रामगढ़ ताल में गिरने से पहले ट्रीटमेंट के लिए जल निगम ने 176 करोड़ की दो अलग-अलग योजनाएं तैयार की हैं। इनमें से एक की स्वीकृति भी हो चुकी है।
करीब 1700 एकड़ में फैले रामगढ़ताल का राष्ट्रीय झील संरक्षण परियोजना के तहत कायाकल्प हो रहा है। करीब 125 करोड़ रुपये की इस योजना के अंतर्गत रामगढ़ ताल के गाद और जलकुंभी की सफाई के अलावा दो सीवरेज ट्रीटमेंट बनाकर इसमें गिरने वाले शहर के गंदे पानी का ट्रीटमेंट भी था। दोनों ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार हो गए लेकिन अब भी शहर के पांच वार्डों महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर एक, महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो, इंजीनियरिंग कॉलेज, झरना टोला और गिरधरगंज के घरों का गंदा पानी सीधे रामगढ़ ताल में गिरता है। एनजीटी की सख्ती के बाद जल निगम ने रामगढ़ ताल में गिरने वाले सभी नालों का टैप कर 15 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) में मिलाने की योजना तैयार की है। इनमें से अपर जोन की करीब 72.27 करोड़ की योजना को केंद्र और प्रदेश सरकार की स्वीकृति मिल गई है। वहीं, 104.4 करोड़ की दूसरी परियोजना का डीपीआर भी शासन को भेजा जा चुका है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रामगढ़ ताल में सारा पानी ट्रीटमेंट होने के बाद ही गिर सकेगा।
योजना एक नजर में
इन पांच वार्डों के घरों का गंदा पानी गिरता है रामगढ़ ताल में
-वार्ड-1 (महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर-1), वार्ड-8 (महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर-2), वार्ड संख्या 18- (इंजीनियरिंग कॉलेज), वार्ड संख्या-20 (झरना टोला), वार्ड संख्या-48 (गिरधर गंज)
- परियोजना की कुल लागत- 176.67 करोड़ -(अपर जोन- 72.27 करोड़, लोअर जोन-104.40 करोड़)
- कुल घरों की संख्या- 13360 (अपर जोन- 9180, लोअर जोन- 4180)
- सीवर लाइन की लंबाई- 136.04 किलोमीटर (अपर जोन- 55.57 किलोमीटर, लोअर जोन- 80.27 किलोमीटर)
- 15 एमएलडी क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से इसे जोड़ा जाएगा।
‘सहारा’ के गंदे पानी का विकल्प ढूंढेगा जल निगम
गोरखपुर। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट खराब होने के बाद अभी सहारा इस्टेट का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के रामगढ़ ताल में गिरता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सहारा प्रबंधन को नोटिस भेजा है। वहीं, एनजीटी ने जिला प्रशासन, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ भी इस मामले में सख्ती की है। इसके बाद डीएम ने रामगढ़ ताल परियोजना के अधिकारियों को सहारा इस्टेट के गंदे पानी का रास्ता ढूंढने का निर्देश दिया है। इसके बाद लखनऊ से आई टीम ने सहारा इस्टेट से रामगढ़ ताल में गिरने वाले पानी की मात्रा की जांच भी की है।