गोरखपुर। जनकल्याण के लिए चल रही सरकारी योजनाओं को भी तमाम लोगों ने धन हड़पने का मौका समझ लिया है। शौचालय निर्माण को अनुदान योजना में यह बात सामने आई। 20 हजार रुपये पाने के लिए तमाम ऐसे लोगों ने आवेदन कर दिया जो किराए के मकान में रहते हैं जहां पहले से ही यह सुविधा मौजूद है। यही नहीं जिन लोगों ने पीएम आवास (इसमें वह सुविधा पहले से शामिल है) के लिए आवेदन किया है, वे भी 20 हजार पाने की लाइन में लग गए। पीछे तो कई वे लोग भी नहीं रहे जिनके पास अपनी जमीन ही नहीं है। जांच के बाद हैरान नगर निगम ने ऐसे 7500 आवेदन रद्द कर दिए।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में शुरुआती दौर में 10942 ऐसे लोगों को चिह्नित किया गया, जिनके घरों में शौचालय नहीं थे। सरकार की इस योजना के तहत शहर इन सभी लोगों को इसके निर्माण के लिए अनुदान का प्रावधान है। शहरी क्षेत्र में अब 20 हजार रुपये मिलते हैं। पहले यह रकम सिर्फ आठ हजार रुपये थी। अब शासन की ओर से 8 हजार और नगर निगम की ओर से 12 हजार रुपये देने का प्रावधान है। बढ़ी राशि का प्रावधान केवल नए आवेदकों के लिए है। इसकी घोषणा के बाद में तो आवेदकों की बाढ़ आ गई। 19 हजार आवेदन आ गए। जब नगर निगम की टीम ने भौतिक सत्यापन किया तो 7500 आवेदक फर्जी निकले। मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश रस्तोगी ने बताया कि ऐसे सभी आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं।
प्रधानमंत्री आवास के आवेदकों ने भी लाइन में
जिन लोगों ने प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन किया है, उन्होंने भी शौचालय निर्माण के लिए अनुदान हेतु आवेदन किया है। कई लोगों ने जिस जमीन पर निर्माण कराने संबंधी जिक्र किया है, या तो वह जमीन सरकारी है या विवादित। ऐसे में इन आवेदनों को भी निरस्त कर दिया गया है।
इन्होंने तो धन भी ले लिया पर बनवा नहीं रहे
गोरखपुर। खुले में शौच से मुक्त शहर के नगर निगम की कोशिश को शहर के लोग ही असफल करने में लगे हुए हैं। हजारों लोग ऐसे हैं जिन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनाने के लिए अनुदान की पहली किस्त ले ली है, लेकिन निर्माण नहीं कराया। 10185 लोगों को इस मद में अनुदान की पहली किस्त दी गई पर सिर्फ 5800 लोगों ने ही निर्माण कराया। दरअसल इस योजना के तहत प्रावधान है कि जब तक पहली किस्त में मिली रकम से निर्माण की फोटो स्वच्छ भारत मिशन की वेबसाइट पर अपलोड नहीं होती है तब तक दूसरी किस्त जारी नहीं होती। नगर आयुक्त ने कहा कि जिन लोगों ने पहली किस्त की रकम लेने के बाद निर्माण नहीं कराया है, उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। सत्यापन के बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।