बक्शीपुर एमएसआई इंटर कालेज में शनिवार की रात उर्दू और हिंदी के नामचीन रचनाकारों की मौजूदगी में गंगा-जमुनी तहजीब की बेमिसाल झलक देखने को मिली। मौका था सैय्यद मजहर अली शाह मेमोरियल आल इंडिया मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का। ‘कहीं ज़मीं तो कहीं आसमां है गोरखपुर, मेरी निगाह में दोनों जहां है गोरखपुर।’ बोलते हुए आयोजक डॉ. विजाहत करीम ने अदब की महफिल का आगाज कराया, जिसके बाद कवियों व शायरों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं पेश की और कैंपस में मौजूद भीड़ के बीच से दाद-ओ-तहसीन का सिलसिला आगे बढ़ता गया।
मंच के संचालन का जिम्मा संभाले कलीम कैसर के आमंत्रण पर माइक संभालने आए इकबाल अशहर ने जैसे ही बोला ‘उर्दू है मेरा नाम मैं खुसरो की पहेली, मैं मीर की हमराज हूं गालिब की सहेली’, श्रोताओं के बीच से दाद देने की होड़ सी लग गई। इसके बाद बारी आई शायर उस्मान मिनाई की, जिन्होंने चुनावी मौसम को मौजू बनाते हुए कहा, ‘इलेक्शन तक गरीबों का वो हुजरा देखते हैं, हुकूमत मिल गई तो सिर्फ मुजरा देखते हैं।’ राजनीति और राजनेताओं को उन्होंने इतने पर ही नहीं बख्शा। आगे पढ़ा, ‘न वो काशी न वो मथुरा की तरफ जाएगा, वो विधायक है वो गोवा की तरफ जाएगा।’
साहित्य की इस महफिल का हिस्सा बनने के लिए ठंड की परवाह किए बिना जहां तमाम लोग कॉलेज ग्राउंड पर जुटे वहीं प्रोफेसर वसीम बरेलवी, मंजर भोपाली, डॉ. माजिद देवबंदी को सुनने के लिए देर रात तक अपनी जगह से टस से मस नहीं हुए। इस बीच सुनील तंग, डॉ. अनिल चौबे, पीके धुत ने हास्य रस की फुहारों से लोगों को गुदगुदाया तो डॉ. नसीम निकहत, अंशू प्रिया, प्रमोद तिवारी, शाइस्ता सना, शबीना अदीब, हसन काजमी, अना देहलवी, मलिक जादा जावेद की कही भी लोगों को खूब लुभाई। कार्यक्रम की सदारत जस्टिस कलीमुल्लाह ने की, जबकि मेहमान-ए-खुसूसी आईएसएस अफसर डॉ. अखिलेश मिश्र रहे।
शहर की शान को मिला सम्मान
स्टार चेरिटेबुल ट्रस्ट की ओर से आयोजित महफिल में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया गया। इनमें डॉ. वेद प्रकाश पांडेय, डॉ. हर्षवर्धन, प्रो. हर्ष सिन्हा, अशफाक अहमद उमर, डॉ. दरखशां ताजवर, जितेंद्र देव उपाध्याय शामिल थे।
दो पुस्तकों का विमोचन
जस्टिस कलीमुल्लाह, डॉ. अखिलेश मिश्र, डॉ. विजाहत करीम, डॉ. कलीम कैसर, डॉ. माजिद देवबंदी, ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. सुरहिता करीम, डॉ. अजीज अहमद ने नवोदित कहानीकार हेमलता ओझा के कहानी संग्रह कशमकश का विमोचन किया। इस मौके पर इकबाल उमर और हमीदुल्लाह की मेहनत से संकलित एमएसआई के उस्ताद रहे शेख जग्गू की शायरी और गजलों के संग्रह का भी विमोचन हुआ।