गोरखपुर।
राधाबाबा की तिरोधान दिवस (पुण्यतिथि) के उपलक्ष्य में गीतावाटिका में जारी कथा के तीसरे दिन बुधवार को वृंदावन से पधारे व्यास योगेंद्र शास्त्री ने श्रीमद्भागवत महापुराण के दसवें स्कंद पर आधारित कथा सुनाई। कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाई।
कथा व्यास ने कहा कि देवकी के सातवें गर्भ में शेषावतार बलरामजी का आगमन हुआ। तब भगवान ने योगमाया को बुलाकर कहा कि बलराम का जन्म देवकी के गर्भ से होने पर मेरी लीला का क्रम बिगड़ जाएगा। इसलिए आप इन्हें वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दीजिए और आप स्वयं देवकी के गर्भ में विराजित हो जाइए। आपका अवतार जगत का मंगल करेगा। प्रत्येक नवरात्रि में लोग आपकी उपासना करेंगे। कथा व्यास ने कहा कि भगवान के नाम की महिमा ऐसी है जो कथा कहने और सुनने दोनों की पात्रता प्रदान करती है। भगवान चाहें तो केवल अपने संकल्प से ही दुष्टों का संहार कर सकते हैं। लेकिन वे ऐसा न करके धराधाम पर अवतार लेते हैं। अपनी मनोहारी लीलाओं के माध्यम से प्रेमियों को प्रेमदान करते हैं। इस मौके पर कथा स्थल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा।