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बंद आंखों से जेल की निगरानी

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रवि राय
गोरखपुर।
सीएम सिटी में जेल की निगरानी ‘बंद आंखों’ (खराब सीसीटीवी कैमरे) से की जा रही है। एक साल हो गए लेकिन खराब कैमरे दुरुस्त कराने की जहमत नहीं उठाई गई। इसी की आड़ में मनमानी भी की जा रही है। यह हाल तब है, जब गोरखपुर जेल संवेदनशील जेलों की सूची में शामिल है।
प्रदेश की संवेदनशील जेलों की सूची में गोरखपुर जेल पांचवें नंबर पर है। इसी लिहाज से जेल में 32 कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों की मदद से जेल अधीक्षक कंट्रोल रूम में बैठकर सभी बैरकों पर निगाह रखते थे लेकिन अब यह सुविधा नहीं है। 13 अक्टूबर 2016 को एक बंदी की मौत के बाद भड़के कैदियों ने जमकर बवाल काटा था। कहा गया कि कैदियों ने ही 30 कैमरे तोड़ डाले, ताकि कोई रिकॉर्ड न मिल सके। ये कैमरे अभी तक खराब हैं। इस मामले में केस भी दर्ज कराया गया था, जिसकी शाहपुर थाने में विवेचना चल रही है। इस बवाल के बाद ही कैमरों को ठीक कराने के लिए शासन को पत्र लिखा गया लेकिन कोई पहल नहीं हुई। जेल में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी, उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी, संजय यादव, सुधीर सिंह, पवन सिंह, सुभाष शर्मा सहित तमाम लोग बंद हैं। सिर्फ दो कैमरों की मदद से जेल की निगरानी की जा रही है।
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यहां लगाए गए थे कैमरे
जेल के इंट्री प्वाइंट पर, किचन, बैरकों के आसपास के गलियारों, मुलाकाती स्थल, महिला बैरक समेत जेल के हर कोने की निगरानी को कैमरे लगाए गए थे।

जैमर भी दिखावा
जेल में मोबाइल फोन का इस्तेमाल बढ़ने पर जैमर भी लगाया गया, मगर इसमें भी बड़ा खेल हो गया। यहां लगे तीन जैमर सिर्फ टू जी नेटवर्क को ही जाम कर पाते हैं, जबकि इस समय में ज्यादातर के पास 4जी नेटवर्क वाले फोन हैं। सूत्र ये भी बताते हैं कि बिजली गुल होने पर जेनरेटर चलाया ही नहीं जाता।
कोट
कैमरे जल्द दुरुस्त करा लिए जाएंगे। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है। जेल की सुरक्षा, मॉनीटरिंग के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
- डॉ. रामधनी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
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