गोरखपुर। जेल में बंद डॉ. राजीव मिश्र और डॉ. पूर्णिमा से रविवार को उनके बेटे पूरक मिश्र ने मुलाकात की। चाचा पार्थसारथी के साथ सुबह जेल पहुंचे पूरक ने पहले शिफ्ट में ही मुलाकात की अर्जी दी, मगर सुरक्षा और भीड़ को देखते हुए जेल प्रशासन ने दूसरे शिफ्ट में मुलाकात की अनुमति दी। इस कारण करीब दो घंटे तक वह जेल के बाहर इंतजार करते रहे। मुलाकात के लिए नेहरू बैरक से काले रंग का कढ़ाईदार कुर्ता पहनकर डॉ. राजीव मिश्र बाहर निकले। डॉ. पूर्णिमा भी काले रंग की कुर्ती पहनकर वीडियो कांफ्रेंसिंग कक्ष के पास पहुंची। फर्श पर चादर बिछाकर दोनों बैठ गए। पूरक और पार्थसारथी ने उनसे सादे कागज पर हस्ताक्षर कराए और फल-कपड़े दिए। जेल से लौटते वक्त दोनों मायूस दिखे।
डिप्टी जेलर पर भड़क गई डॉ. पूर्णिमा
गोरखपुर। डॉक्टर दंपती से उनके बेटे द्वारा सादे पन्ने पर हस्ताक्षर कराने और बाद में जेल से निकलते वक्त बेटे पूरक का बैग चेक करने पर डॉ. पूर्णिमा डिप्टी जेलर पर भड़क गईं। बोलीं, ‘गेट पर तो सामानों की चेकिंग हुई है, फिर दोबार चेकिंग की क्या जरूरत है। किसी कागजात पर हस्ताक्षर नहीं हुआ है।’ इसके बाद वह उल्टे डिप्टी जेलर से सवाल करने लगीं। कहा, ‘आप को मैने प्रार्थना पत्र दिया है, उस पर क्या विचार हो रहा है।’ यह सुनकर डिप्टी जेलर मुस्कराए और कहा, ‘प्रार्थना पत्र आगे भेज दी गई है। चेकिंग जेल के नियम का हिस्सा है।’ इस दौरान कमर पर हाथ रखकर डॉॅ. राजीव सब कुछ सुनते रहे और खामोश रहे।
रविवार दोपहर मुलाकात के दौरान जेल में डिप्टी जेलर की नजर वीडियो कांफ्रेंसिंग कक्ष पर पड़ी तो डॉ. दंपती किसी सादे पन्ने पर हस्ताक्षर कर रहे थे। जैसे ही डॉक्टर दंपती बेटे से अलग हुए, जेल अधिकारियों ने दोनों को पास बुला लिया और पूरक मिश्र से सादे कागज पर हस्ताक्षर कराने के बारे में पूछताछ करने लगे और बैग चेक करने लगे तो पूरक बेचैन हो उठे। इस पर डिप्टी जेलर एके सिंह ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि बिना जेल प्रशासन की अनुमति से आप इस तरह की हरकत नहीं कर सकते हैं।
पूर्व मंत्री अमरमणि ने पूछा कुशलक्षेम
बैरक में वापस जाते समय पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और डॉक्टर दंपती का आमना-सामना हो गया। सूत्रों का कहना है कि कुछ दूरी पर खड़े पूर्व प्रिंसिपल ने हाथ जोड़कर अमरमणि को नमस्कार किया। इस पर अमरमणि ने उनसे कुशलक्षेम पूछा। डॉ. पूर्णिमा, पूरक और पार्थसारथी से भी उन्होंने बातचीत की। करीब दो मिनट की औपचारिक मुलाकात होने के बाद दोनों अपने-अपने बैरक में लौट गए।
तैयार हो रहा रिकॉर्ड
मेडिकल कॉलेज प्रकरण में डॉॅ. राजीव, पूर्णिमा और कफील की गिरफ्तारी के बाद जेल प्रशासन ने तीनों का रिकॉर्ड बनाना शुरू कर दिया है। तीनों से मिलने वाले, मुलाकात की अर्जी देने वाले और मेडिकल चेकअप की रिपोर्ट सहित अन्य जानकारी एक फाइल में एकत्रित की जा रही है।
3154 कफील का क्रमांक
शनिवार रात साढ़े आठ बजे के करीब डॉ. कफील को जेल लाया गया। उसे 3154 संख्या दी गई है। जेल में कफील की पहचान इसी नंबर से हो रही है। डॉ. पूर्णिमा शुक्ला और राजीव को भी क्रमांक जारी किया गया है।
जेल में सतर्कता बरती जा रहे है। डॉ. कफील से मुलाकात करने के लिए उनका भाई आया था। डॉक्टर दंपती ने भी घरवालों से मुलाकात की है। सभी आम बंदी की तरह जेल में है।
- डॉ. रामधनी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक