गोरखपुर।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के बीच मौतों को लेकर लपेटे में आई पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र की पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला विभागीय जांच में बच निकलेंगी। होम्योपैथी विभाग की ओर से दी गई जांच रिपोर्ट और आरोप हल्के हैं लेकिन बीआरडी कर्मचारियों का बयान मैडम की परेशानी बढ़ाएगा।
बीआरडी की दुर्व्यवस्था में डॉ. पूर्णिमा शुक्ला पर कमीशनखोरी के आरोप लगे तो होम्यापैथी विभाग समेत आयुष के विशेष सचिव की ओर से जांच कराई गई। इसके आधार पर निलंबन के बाद उन पर केस दर्ज हुआ। होम्यापैथी विभाग के अफसर के मुताबिक विभागीय जांच में डॉ. पूर्णिमा शुक्ला आरोपों से बच निकलेंगी, लेकिन बीआरडी के पूर्व एसआईसी एके श्रीवास्तव और 20 से ज्यादा कर्मचारियों का लिखित बयान उन्हें मुश्किलों में डालेगा। विशेष सचिव यतींद्र मोहन, निदेशक विनोद कुमार विमल और संयुक्त सचिव ऋषिकेश दुबे की समिति के आगे इन कर्मचारियों ने ‘मैडम’ के प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप समेत विभिन्न मदों में कमीशन वसूली की शिकायत की है। सूत्रों के मुताबिक इसमें दवा व अन्य सामान की खरीद से लेकर विभिन्न अनुबंधों में मैडम किस तरह से वसूली करती थीं और कौन-कौन उनके मददगार थे, इसकी भी जानकारी दी गई है। भ्रष्टाचार के इन गंभीर आरोपों की जांच में बच निकलना डॉ. पूर्णिमा शुक्ला के लिए लगभग नामुमकिन है।
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25 सितंबर तक आएगी विस्तृत जांच रिपोर्ट
बीआरडी कर्मचारियों के इस बयान के बाद शासन की ओर से डॉ. पूर्णिमा के खिलाफ विस्तृत जांच शुरू हो चुकी है। विशेष सचिव आयुष शारदा सिंह को बीआरडी में ‘मैडम’ की कमीशनखोरी की जांच कर 25 सितंबर तक शासन को रिपोर्ट देनी है। माना जा रहा है कि इसके आधार पर डॉ. पूर्णिमा के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।