गोरखपुर।
लोकगीतों की स्वरलहरी रविवार को गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षा भवन में फूटी तो शाम जवां हो गई। कभी कजरी की तान छिड़ी तो किसी ने झूमर सुनाया। कोई पचरा तो किसी ने पूरबी गाई। पूरबी, चैता, फगुआ, खिलौना, कजरी, सोहर, नकटा, हल्दी गीत, संझा पराती आदि विधाओं के गीतों से महफिल लोकगीतों के इंद्रधनुष में तब्दील हो गक्त्रस्। भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (भाई) ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी के ललित कला एवं संगीत विभाग की जुगलबंदी में हुए इस कार्यक्रम में तालियां गूंजीं तो कभी लोग कुर्सी से उठकर नाचते नजर आए। ‘के बनी माटी के लाल’ रियलिटी शो के फाइनल में सभी 12 प्रतिभागी एक से बढ़कर एक निकले।
पहले प्रतिभागी फाजिलनगर के सत्यप्रकाश पांडेय ने कजरी की तान छेड़ी तो धरती के अचरा में छल-छल मोती बिखरने लगे। इसके बाद छपरइया पूरबी ‘ए परदेसी बलम...’ गाकर पति के विरह में डूबी पत्नी की पीड़ा बयां की। फाजिलनगर के बड़हरा गांव के दीपक ने पहले फोक सुनाया फिर पचरा गाया। पचरा के जरिए सुनील यादव ने भी गायकी का लोहा मनवाया। फिर निर्णायकों की फरमाइश पर कहरउवा गाया। फाजिलनगर के धनंजय सिंह ने पूरबी की तान छेड़कर लोगों को झूमने को मजबूर कर दिया। आदर्श मौर्य की कजरी ने भी समां बांधा। इसके बाद हाटा के 10 वर्षीय श्रेयांश की आवाज का जादू लोगों के सिर चढ़ गया। फोक के बाद भिखारी ठाकुर की उन्होंने पूरबी सुनाई तो श्रोताओं की ओर से एक गीत और... एक गीत और का शोर होने लगा। आयोजकों ने लोगों को शांत कराया। कुशीनगर के सत्यप्रकाश तिवारी ने पूरबी और निर्गुण की प्रस्तुति दी। गोरखपुर की अनन्या ने नकटा और कहरउवा गाकर अपनी सुरीली आवाज से लोगों को मुग्ध किया तो वहीं बाबुल कुमार ने दादरा व विदेशिया सुनाया। राहुल व्यास ने पूरबी व कजरी से तालियां बटोरीं। अजीत कुमार ने मारो गीत और चैता सुनाकर वाहवाही बटोरी। निर्णायक मंडल में रामदरश शर्मा, राकेश उपाध्याय और बृज किशोर त्रिपाठी गुलाब थे। वाद्यों पर संगत मनोज, अखिलेश, मोहम्मद शकील और गौरव मिश्रा ने दी।
दिव्यांग राहुल ब्यास बने माटी के लाल
आंखें नहीं हैं पर हुनर में कूट-कूटकर भरा है। ऑडिशन से लेकर फाइनल तक हर कदम पर राहुल ब्यास ने इसका अहसास कराया। मां राबड़ी देवी और भाई नीलेश के साथ देवरिया से आए राहुल जितना सुरीला गाते हैं उतना ही बेमिसाल हारमोनियम, तबला और आर्गन भी बजाते हैं। उन्हें 21000 का चेक और स्मृति चिह्न भेंट किया गया। अन्य प्रतिभागियों को 1100 रुपये और स्मृति चिह्न दिया गया। मासूम श्रेयांश को श्रोताओं की ओर से 1000 रुपये का पुरस्कार अलग से मिला।
भोजपुरी के रंग में रंगे मुख्य अतिथि
राज्यमंत्री स्वतंत्रदेव सिंह भी भोजपुरी के रंग में रंगे नजर आए। मुख्य प्रायोजक राकेश सारस्वत व भाई क्षेत्रीय निदेशक राकेश श्रीवास्तव को आयोजन के लिए उन्होंने बधाई भोजपुरी में दी और इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए आवाज बुलंद करने का भरोसा भी दिया। इससे पहले वरिष्ठ लोक गायिका मैनावती देवी को देखते ही चरण छूकर आशीर्वाद लिया। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि मेयर डॉ. सत्या पांडे, पूर्व मेयर अंजू चौधरी, पुष्पदंत जैन आदि मौजूद रहे। पूर्वांचल ग्रामीण बैंक के रवि द्विवेदी ने स्वतंत्रदेव सिंह को उनका पोट्रेट भेंट किया। संचालन शिवम पांडेय ने किया।