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खोते लोकगीतों को बचाएगा के बनी माटी के लाल

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गोरखपुर।
गुम हो रहे लोकगीतों की स्वरलहरी शहर की फिजा में रविवार को बिखरेगी। कानों में मिठास घोलती लोक गायकों की आवाज भोजपुरी लोक परंपरा के संरक्षण और संवर्धन का तान छेड़ेगी। भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (भाई) ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी के ललित कला एवं संगीत विभाग के साथ जुगलबंदी करके पूर्वांचल की लोक परंपरा में बसे लोकगीतों को पुनर्जीवित करने के लिए सांस्कृतिक आंदोलन छेड़ा है। इसी के तहत गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षा भवन में 23 जुलाई को लोक गायिका मैनावती श्रीवास्तव की अध्यक्षता में ‘के बनी माटी के लाल’ रियलिटी शो का फाइनल राउंड होगा।
कार्यक्रम के संयोजक एवं भाई के क्षेत्रीय निदेशक राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि गायकों ही नहीं श्रोताओं के लिए यह एक मौका है कि वे अपनी परंपरा को जानें और समझें। हम इस कार्यक्रम के जरिए प्रतिभावान गायकों को अपनी संगीत परंपरा को सीखने जानने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। साथ ही उन्हें यह भी समझाना चाहते हैं कि पारंपरिक लोक संगीत भी उनके लिए सफलता के दरवाजे खोल सकता है। रियलिटी शो में गोरखपुर ही नहीं पूर्वांचल और बिहार के भी लोक गायक शिरकत करेंगे। भाई के मंच से रविवार को पूरबी, चैता, फगुआ, खिलौना, कजरी, सोहर, झुमर, नकटा, हल्दी गीत, संझा पराती आदि भोजपुरी के लोकगीतों से लोग रूबरू हो सकेंगे। हर लोक गायक दो विधाओं में प्रस्तुति देगा।
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सत्यप्रकाश बिखेरेंगे पूरबी और निर्गुण का जादू
कुशीनगर के सत्यप्रकाश तिवारी रियलिटी शो में पूरबी और निर्गुण की प्रस्तुति देंगे। इन दो विधाओं के गीतों का जादू चलाकर सत्यप्रकाश की मंशा रियलिटी शो का विनर बनने की है। सत्यप्रकाश ने बताया कि इस साल उन्होंने संगीत में प्रभाकर की उपाधि ली है। पिता से गायकी का ककहरा सीखने वाले सत्यप्रकाश को अपनी जीत का पूरा भरोसा है।

फोक और पचरा से लोगों को दीवाना करेंगे दीपक
फाजिलनगर के बड़हरा गांव निवासी दीपक दीवाना रात सवा नौ बजे भी रियाज में जुटे थे। रियलिटी शो का विनर बनने के लिए वह कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। दीपक बताते हैं कि पहली प्रस्तुति फोक की दूंगा। दूसरी विधा के तौर पर पचरा का चुनाव किया है। फोक विरह पर केंद्रित है तो पचरा में देवी भक्ति का रस घुला होता है।

अनन्या को नकटा, कहरउवा पर भरोसा
बिछिया स्थित सर्वोदय नगर निवासी अनन्या सिंह को नकटा और कहरउवा विधा पर भरोसा है। अनन्या बताती हैं कि नकटा ब्याह मंडप में गाया जाता है। इसका उद्देश्य होता है कि बारातियों को नींद न आए और लोग माहौल का आनंद ले सकें। वहीं कहरउवा विधा ताल प्रधान होती है। इसमें गायक ताल के साथ खास अंदाज में गाता है।
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10 साल के श्रेयांश साबित हो सकते हैं 20
देवरिया महोत्सव में आयोजित संगीत प्रतियोगिता में विनर बनकर उभरे 10 साल के श्रेयांश रियलिटी शो में प्रतियोगियों पर 20 पड़ सकते हैं। भोजपुरी फोक गाएंगे तो दूसरी विधा के तौर पर पूरबी की प्रस्तुति देंगे। वह इन दिनों दोनों गीतों पर जमकर रियाज कर रहे हैं। वह फोक के साथ भिखारी ठाकुर की पुरबी की तान का जादू बिखेरेंगे।
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