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गोरखपुर के लाल ने बचाई कईयों की जान

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श्रीनगर में शहीद गोरखपुर के लाल साहब शुक्ला की बहादुरी के चलते ही सीआरपीएफ डीपीएस स्कूल में छिपे दो आतंकियों को मारने में कामयाब हुई है। यह कहना है सीआरपीएफ के कमांडेंट का। शहीद का पार्थिव शरीर लेकर गोरखपुर पहुंचने पर उन्होंने कहा कि आतंकवादी घर में घुसकर सीआरपीएफ के जवानों को निशाना बनाना चाहते थे। इसमें अगर वो सफल हो जाते तो बड़ा नुकसान होता लेकिन साहब शुक्ला ने ऐसा नहीं होने दिया। आतंकवादियों को देखते ही साहब फ्रंट पर आ गए और ललकार कर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद फायरिंग करते हुए आतंकी डीपीएस स्कूल की तरफ भागे और उनकी गोली साहब के सीने में आ धंसी।
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गोरखपुर के बेलीपार क्षेत्र के मझगांव निवासी सीआरपीएफ के सब इंस्पेक्टर साहब शुक्ला 24 जून को आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। दो दिन बार उनके शव को पूरे राजकीय सम्मान के साथ रविवार को गोरखपुर लाया गया था। यहां जिला अस्पताल के मोर्चरी हाउस में शव रखा गया था। यहां से शव को ले जाने आए साथी जवान ने बताया कि उनकी टीम बस से श्रीनगर के कैंट इलाके से कांबिंग के लिए जा रही थी। इसी दौरान साहब ने दो आतंकियों को बस से ही दूर से आते देख लिया था। उन्होंने लीड कर आगे बढ़ते हुए दोनों आतंकियों को टारगेट किया। इसी बीच आतंकी किसी घर में घुसने की फिराक में थे लेकिन साहब की बहादुरी की वजह से वे वही पास के डीपीएस स्कूल में जा घुसे। आतंकियों ने अचानक गोली चलानी शुरू कर दी। यही गोली साहब को आ लगी और वह वहीं गिर पड़े। इसके अलावा एक और जवान व एक राहगीर की भी गोली लगने से मौत हो गई थी। जवाब में साथियों ने आतंकियों पर गोलियां चलानी शुरू कीं। आतंकी घबड़ाकर डीपीएस स्कूल में जा घुसे। दो दिनों से सीआरपीएफ की टीम वहां घेरा डाले हुई थी। साथी जवानों ने दो दिन बाद स्कूल में घुसे दोनों आतंकियों को ढेर कर शहीद की शहादत का बदला ले लिया। उन्होंने बताया कि साहब की दिलेरी का ही नतीजा है कि आतंकियों की पहचान हो सकी और उन्हें मारा जा सका, लेकिन साथी साहब के खोने का गम उनकी आंखों में साफ नजर आ रहा था।
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