गोरखपुर। नगर निगम की लापरवाही कहें या मंडी समिति की अनदेखी, खामियाजा महेवा मंडी के फुटकर व्यापारियों को झेलना पड़ा रहा है। इसी खामियाजा का नतीजा रहा कि बारिश से हुए जल जमाव के कारण बृहस्पतिवार और शुक्रवार को मंडी बंद रही लेकिन जिम्मेदारों ने इस पर त्वरित सफाई नहीं कराई। शनिवार को अधूरी सफाई के बीच मंडी में फिर पहले की तरह चहल-पहल देखने को मिली।
महेवा मंडी में फल और सब्जी दोनों का व्यापार एक साथ किया जाता है। लगभग आधे से ज्यादा व्यापारी तो मंडी परिषद के लाइसेंस पर बाकायदा दुकान आवंटित कर व्यापार करते हैं। वहीं एक तिहाई के आसपास फुटकर व्यापारी मंडी परिषद और मंडी समिति के भरोसे अपनी रोजी रोटी चलाते हैं। जरा सी बारिश इन फुटकर व्यापारियों के रोजगार पर खासा असर डाल देती है। बारिश की गंदगी के कारण लगातार दो दिनों तक ये लोग अपनी दुकानें नहीं खोल सके। सफाई के नाम पर सिर्फ कचरे का ढेर उठाया गया था। दो दिनों बाद संबंधित जिम्मेदारों को इनकी सुध आई लेकिन फिर भी पूरी तरह साफ सफाई नहीं की जा सकी। मजबूर होकर फुटकर व्यापारियों ने शनिवार को फिर से गंदगी की आड़ में ही दुकानें खोल दी। मंडी में पहले की तरह ही चहल पहल भी था। सब्जी मंडी समिति के अध्यक्ष विनोद दुबे ने गंदगी के बाबत बताया कि मंडी की साफ सफाई का जिम्मा नगर निगम को दिया गया है। ठेकेदार हैं कि मानक से कम सफाई कर्मियों को लेकर खानापू्र्ति कर देते हैं और अपने हिस्से का भुगतान कर जेब भर लेते हैं। उन्हें मंडी की साफ-सफाई की कोई चिंता नहीं होती है। उन्होंने कहा कि इसी गंदगी का नतीजा है कि मंडी में काम करने वाले फेंकू राम का बेटा बाल किशन बीमार हो गया और कोमा में है।