रामगढ़ ताल के पास 121 एकड़ में बन रहे चिड़ियाघर में गोरखपुर की विशिष्ट पहचान टेराकोटा की छाप भी नजर आएगी। स्थानीय टेराकोटा शिल्पी पशु-पक्षिओं के बाड़ों के सामने उनकी छवि उकेरेंगे। जिस पर उसके बारे में पूरी जानकारी भी अंकित की जाएगी। इससे लोगों को खासकर बच्चों को पशु-पक्षियों के बारे में समझने में मदद मिलेगी। देहरादून वाइल्ड लाइफ की प्रोफेसर पितापी सिन्हा निर्माण निगम की टीम को इस बारे में सुझाव दिया है।
चिड़ियाघर में जगह-जगह आठ फीट के लोहे के कूड़ेदान भी रखे जाएंगे। इन पर भी टेराकोटा की कलाकृतियां नजर आएंगी। इस कवायद से टेराकोटा शिल्प को तो बढ़ावा मिलेगा ही देश-विदेश से आने वाले लोग इस कला से परिचित हो सकेंगे। प्रोफेसर पितापी सिन्हा की टीम ने बीते दिनों चिड़ियाघर का निरीक्षण दिया। इस दौरान वे टेराकोटा कलाकारों से भी मिलीं। इस बारे में उनसे सुझाव भी लिए।
कोट
चिड़ियाघर में अधिक से अधिक टेराकोटा की कलाकृतियां उकेरी जाएगी। इससे स्थानीय कलाकारों को रोजगार भी मिलेगा। वाइल्ड लाइफ की प्रोफेसर पितापी सिन्हा ने निरीक्षण किया है। उसके सुझाव पर काम किया जाएगा । - डीबी सिंह, परियोजना प्रबंधक, निर्माण निगम