गोरखपुर। आवास, शौचालय और अनाज ही नहीं तबादलों में भी खेल हो रहा है। ऐसा ही चौंकाने वाला मामला ग्र्राम्य विकास विभाग में सामने आया है। आचार संहिता लागू होने से पहले किए गए 14 ग्राम्य विकास अधिकारियों के तबादले में से पांच तबादले फर्जी पाए गए हैं। मामला सामने आने के बाद से ही विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। आनन-फानन में सभी फर्जी तबादले निरस्त करने के साथ ही मामले की जांच शुरू हो गई है।
लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने से पहले मार्च के पहले हफ्ते में ग्राम्य विकास विभाग में बड़े पैमाने पर अफसरों के तबादले हुए थे। इनमें डीडीओ बब्बन उपाध्याय भी बदल दिए गए। अपने तबादले के पहले डीडीओ ने नौ ग्राम्य विकास अधिकारियों के तबादले किए थे। जब ये सभी ग्राम्य विकास अधिकारी अपनी नई तैनाती वाली जगह चार्ज लेने पहुंचे तो खलबली मच गई। वहां पता चला कि नौ नहीं 14 ग्राम्य विकास अधिकारियों का तबादला किया गया है। इसकी सूचना जब सीडीओ अनुज सिंह तक पहुंची तो उन्होंने पड़ताल शुरू की।
पता लगा कि पूर्व डीडीओ बब्बन उपाध्याय ने नौ ग्राम्य विकास अधिकारियों के ही तबादले किए थे। सीडीओ को भी यही सूचना भेजी गई थी। उन्होंने पूर्व डीडीओ से तस्दीक के लिए संपर्क किया तो उन्होंने भी नौ ग्राम्य विकास अधिकारियों के ही तबादले की बात स्वीकारी। इनमें विस्मिल्लाह, अजय कुमार कुशवाहा, नागेंद्र दत्त पांडेय, हरेराम सिंह यादव, विश्वंभर प्रसाद, संजय कुमार सिंह, संजीव कुमार सिंह, अजय कुमार जायसवाल और प्रसून मिश्रा का नाम शामिल है। इसपर सीडीओ ने इन सभी नामों के अलावा बाकी के जिन पांच ग्राम्य विकास अधिकारियों के तबादले हुए थे, उन सभी के तबादले निरस्त कर दिए।
दूसरे पदों के तबादले में भी गड़बड़ी की आशंका
ग्राम्य विकास अधिकारी ही नहीं विभाग में हाल के दिनों में हुए दूसरे पदों के तबादले में भी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। सीडीओ ने सभी बीडीओ को निर्देश दिए हैं कि पिछले 14 दिन के भीतर हुए किसी भी तबादले के मामले में बिना उनकी अनुमति के किसी को नई तैनाती नहीं दी जाए। बृहस्पतिवार को सभी ब्लाकों के अधिकारियों, कार्यालयाध्यक्षों की भी बैठक बुलाई गई थी। सभी को दो टूक निर्देश दिए गए हैं उनके वहां जितने भी तबादले हुए हैं उनकी सूची सीडीओ कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।
कर्मचारी को बताया जा रहा मास्टर माइंड
इस पूरे खेल के पीछे विकास भवन के ही एक कर्मचारी को मास्टर माइंड बताया जा रहा है। इस मामले में कई लोगों से पूछताछ हो चुकी है मगर विभाग के ही एक कर्मचारी पर शक की सुई ज्यादा घूम रही है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक सख्ती के बाद उनकी तबीयत भी खराब हो गई है। यही नहीं इस खेल में कुछ अफसरों के भी शामिल होने की चर्चा है।
ज्यादा बोलने से बच रहे सीडीओ
सीडीओ अनुज सिंह इस मामले में कुछ बोलने से बच रहे । अमर उजाला से हुई बातचीत में उन्होंने तबादलों में फर्जीवाड़े की बात से इनकार कर दिया। हालांकि यह भी कहा कि जो नियमानुसार तबादले हुए हैं, वहीं मान्य होंगे। ब्लाकों से हाल में हुए तबादलों की सूची मंगाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सूची सिर्फ इसलिए मंगाई गई है ताकि यह जाना जा सके कि कौन- कहां तैनात है।
मामला गंभीर है। जो भी तबादले नियमानुसार नहीं हुए थे, उन्हें निरस्त कर दिया गया है। सीडीओ को मामले की जांच सौंपी गई है। जो भी दोषी मिला, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - के. विजयेंद्र पांडियन, डीएम