गोरखपुर। अपराध छोटा हो या बड़ा, किसी अवयस्क को पकड़ें तो उसके साथ संवेदनशीलता से पेश आएं। पेशेवर अपराधियों की तरह व्यवहार न करके कानून के दायरे में रहते हुए पूछताछ की जाए। दूसरे बच्चे यदि किसी शिकायत लेकर आएं तो उनकी बात को भी गौर से सुनें और कार्रवाई करें। उनके मन में ऐसा डर न होने पाए कि वे भविष्य में पुलिस से मदद ही न मांगें।
ये बातें एडीजी दावा शेरपा ने कहीं। पार्क रोड स्थित एक होटल में गुरुवार को वह उप्र महिला सम्मान प्रकोष्ठ एवं यूनिसेफ के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। कार्यशाला में जोन के सभी जिलों से आए पुलिस वालों को किशोरों से संबंधित कानून-नियम और व्यवस्था की जानकारियां दी गईं। राम मनोहर लोहिया यूनिवर्सिटी के प्रो. केएन पांडेय ने बच्चों को नशे से दूर रखने की जरूरत बताई क्योंकि नशे की वजह से ही वे आपराधिक कृत्यों में शामिल होते हैं। बाल संरक्षण अधिकार और 1090 वूमेन पावर हेल्प लाइन की मदद से इसमें सुधार लाया जा सकता है। कार्यशाला में एसएसपी शलभ माथुर, एसपी रेलवे पुष्पांजलि, एसपी सिटी विनय कुमार सिंह, एसपी क्राइम आलोक शर्मा, एसपी ट्रैफिक आदित्य प्रकाश वर्मा आदि शामिल थे। प्रशिक्षण शिविर में आए अफसरों को अब अपने-अपने जिलों में जाकर कार्यशाला का आयोजन करना होगा। ताकि वे यहां से प्राप्त प्रशिक्षण के बारे में अन्य पुलिस वालों को समझा सकें।
टेली फिल्म दिखाकर नियम समझाए
वूमेन पॉवर हेल्प लाइन की एडीजी अंजू गुप्ता ने किशोरों से संबंधित कानूनी नियमों की जानकारियां देने के साथ ही महिला अपराध के बारे में जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने कुछ टेली फिल्में भी दिखाईं।
11 ग्रुपों में बांटकर ली गईं जानकारियां
पुलिस अफसरों को 11 ग्रुपों में बांटकर जानकारियां ली गईं। सभी ग्रुप को अलग-अलग केस स्टडी दी गई और फिर उसे हैंडल करने के सुझाव मांगे गए। इसका मकसद कार्यशाला में पुलिसकर्मियों को कितनी जानकारी मिली, जानना था।