सिद्धार्थनगर। अपनों का साथ ताउम्र बना रहे, ऐसा भला कौन नहीं चाहता। मगर एक छोटी सी भूल ने न जाने कितने परिवारों को उनके चहेेतों से हमेशा के लिए दूर कर दिया। मंजिल तक पहुंचने की हड़बड़ी में बाइक से बिना हेलमेट लगाए निकले और हादसे में अपनी जान गंवा बैठे। किसी मां की कोख सूनी हुई तो किसी का सुहाग उजड़ गया। मासूम बच्चों के सिर से बाप का साया छिना तो भाई की कलाई सजाने का अरमान धरा रह गया। सड़क हादसों ने उन परिवारों को इतने गहरे जख्म दिए कि वे आज भी उससे उबर नहीं पाए हैं। ये परिवार अब हर पल यही दुआ करते हैं कि ऐसा हादसा किसी और के साथ न हो...। वे दूसरों को सचेत भी करते हैं कि ट्रिपल राइडिंग से बचें, हेलमेट लगाएं और सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करें।
डोली से पहले उठी भाई की अर्थी
घटना 28 अप्रैल, 2017 की है। डुमरियागंज के भरवटिया मुस्तकहम निवासी बेचन की बेटी रीता की शाम को बारात आनी थी। बहन को डोली में बिठाकर धूमधाम से विदा करने के लिए बेचन का छोटा पुत्र रामकुमार (24) तैयारियों में जुटा था। शादी का सामान लाने वह शाम चार बजे बाइक से डुमरियागंज के लिए निकला। जल्दबाजी में हेलमेट लगाना भूल गया। शाहपुर-सिंगारजोत मार्ग पर सिरसिया के पास अज्ञात वाहन ने उसे कुचल दिया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। रामकुमार का पूरा शरीर सुरक्षित था, लेकिन सिर कुचल गया था। उन दिनों को याद कर परिवार के लोग आज भी सिहर उठते हैं। तीन साल की बेटी अंकिता को गोद में लेकर सिसकती रामकुमार की पत्नी प्रमिला का कहना था कि हेलमेट होता तो पति की जान नहीं जाती। यह दर्द वह जीते जी कभी नहीं भूलेगी। प्रमिला के मुताबिक, ‘कहते थे कि बहन को अच्छे से विदा करूंगा लेकिन उनके अरमान अधूरे रह गए। बाद में मंदिर से शादी करनी पड़ी।
पति की मौत से टूट गया पूरा परिवार
करीब 20 दिन पहले 24 जनवरी को देर शाम सदर थाना क्षेत्र के हुसैनगंज के पास ट्रैक्टर ट्रॉली की चपेट में आने से बाइक सवार दो युवकों की मौत हो गई थी। दोनों उसका क्षेत्र में गए थे। मृतकों में एक लोटन कोतवाली क्षेत्र के पड़हरा खुर्द निवासी जयप्रकाश त्रिपाठी व दूसरे भगता गांव निवासी प्रेमसागर (40) थे। दोनों ने हेलमेट नहीं लगाया था। जयप्रकाश के दो छोटे बच्चे हैं। बड़ा बेटा अंशू कक्षा छह का छात्र है जबकि बेटी अभी चार वर्ष की है। बच्चों की अच्छी पढ़ाई के लिए ही वह मुख्यालय पर घर बनवा रहे थे और मकान के लिए ही ईंट लेने निकले थे। उनकी मौत के बाद पत्नी बच्चों के साथ मायके जा चुकी हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य दिल्ली चले गए। कुछ ऐसा ही हाल प्रेमसागर के परिवार का भी है। पेशे से राजगीर प्रेमसागर परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। बूढ़ी मां, पत्नी, तीन बेटियां व दो बेटों की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। पत्नी सीता देवी का कहना है कि आमतौर पर पति हेलमेट लगाकर ही घर से निकलते थे लेकिन उस दिन वह जल्दी में बिना हेलमेट ही निकल गए थे। इस जरा सी भूल ने मेरा घर ही उजाड़ दिया। बाइक चलाने वालों से यही कहना है कि नियम का अगर पालन किया जाए तो बहुत सी जान बच सकती है।
पिता की मौत ने दी हेलमेट लगाने की सीख
नगर पालिका के अनूपनगर मोहल्ला निवासी राधेश्याम लाल श्रीवास्तव (45) की वर्ष 2006 में बाइक चलाते समय सिर में चोट लगने से मौत हो गई थी। उसका ब्लॉक में सह समन्वयक के रूप में तैनात राधेश्याम अपनी बाइक से उसका के लिए निकले थे। जल्दबाजी में हेलमेट लगाना भूल गए। हुसैनगंज के पास पहुंचे तभी सड़क किनारे लगे पेड़ पर चढ़कर आम तोड़ रहे कुछ लोगों के हाथ में रखी आम से भरी टोकरी गिर गई जो नीचे से जा रहे राधेश्याम के सिर पर गिरी। असंतुलित होकर वह सड़क पर गिर पड़े। सिर में गंभीर चोट के कारण कुछ दिनों तक उपचार के बाद उनकी मौत हो गई। राधेश्याम के पुत्र निखिल श्रीवास्तव का कहना है कि उनके पिता ने अपने गांव इटौवा (जोगिया ब्लाक) में उच्च शिक्षा के लिए अशरफी लाल महाविद्यालय स्थापित किया था। इसमें मेडिकल की पढ़ाई शुरू कराना चाहते थे लेकिन हादसे के चलते उनका सपना अधूरा रह गया। बीते दिन तो नहीं लौट सकते, मगर यह सबक जरूर मिला कि बाइक पर चलते समय हेलमेट जरूर पहनना है।