महराजगंज। दस हजार रुपये मानदेय के प्रस्ताव पर बिफरे शिक्षामित्रों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। डीएम दफ्तर पर समान कार्य के लिए समान वेतन की आवाज को बुलंद करते हुए शिक्षामित्रों ने आंदोलन तेज करने का एलान किया। कहा कि सरकार सहानुभूति पूर्वक मसले का हल निकाले और शिक्षक बनाने का अध्यादेश लाए। शिक्षामित्रों ने 10 हजार मानेदय वाले शासनादेश की प्रतियां जलाकर विरोध प्रकट किया।
उत्तर प्रदेेश प्राथमिक शिक्षामित्र समायोजित शिक्षक संघ के जिला संरक्षक सनंदन पांडेय ने कहा कि शिक्षामित्रों के मुद्दे पर प्रदेश सरकार के अगंभीर रुख अख्तियार करने से समस्या का समाधान हनीं हो पा रहा है। अगर सरकार चाहती तो कानून के जरिए शिक्षक बना देती, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। तमाम शिक्षामित्र अब बदहाली का जीवन गुजारने को मजबूर हैं। घर-गृहस्थी चलाना मुश्किल हो रहा है। अल्प मानदेय की घोषणा कर सरकार ने जले पर नमक छिड़कने का कार्य किया है। कई बार की वार्ता के बाद सरकार और शिक्षा विभाग ने शिक्षामित्रों के हित में नहीं सोचा। उन्होंने एनसीटीई एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव भेजने की मांग की।
जिलाध्यक्ष राधेश्याम गुप्ता ने कहा कि शिक्षामित्र अब आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हो चुके हैं। आश्वासन के बाद भी मांगों को पूरा न कर सरकार ने धोखा देने का कार्य किया है। जिन बिंदुओें पर बेसिक शिक्षा सचिव से वार्ता में जिन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उसे कैबिनेट में पास नहीं किया गया। यह शिक्षामित्रों के साथ अन्याय है। इस दौरान गोपाल यादव, शैलेंद्र नायक, ओम प्रकाश त्रिपाठी, सरिता, अनुराधा यादव, धर्मावती उपाध्याय, प्रद्युम्न पटेल, मुन्नर प्रसाद, अंबिका प्रसाद, अर्चना पांडेय, प्रेम सागर, विनोद कुमार, बनवारी लाल, रंजन यादव, मनु निषाद, शत्रुघ्न यादव, राजेश धर द्विवेदी, राकेश मणि त्रिपाठी, राजेंद्र राय, महेश सिंह आदि मौजूद रहे।