गोरखपुर।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खनन क्षेत्र में भ्रष्टाचार खत्म करने और भवनों के निर्माण सामग्री की महंगाई पर गंभीर हैं। उन्होंने क हा कि मैंने खनन क्षेत्र में होने वाली गुंडागर्दी को रोकने के लिए सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही इस क्षेत्र में भ्रष्टाचार पर काबू पाने के लिए सरकार ने अब ई टेंडरिंग के जरिए ही खनन पट्टे देने का फैसला किया है। अगले महीने ई टेंडरिंग के जरिए ही 1200 खनन बांटे जाएंगे। इस प्रकिया से एक ही व्यक्ति के नाम पर कई पट्टे हासिल करने पर भी रोक लगेगी। इसके अलावा बार निर्माण क्षेत्र में सक्रिय सरकारी एजेंसियों को भी खनन के पट्टे दिए जाएंगे। एनएचएआई और विकास प्राधिकरणों को ई टेंडरिंग में हिस्सेदारी करने को कहा गया है। इससे सरकारी एजेंसियों को कम से कम 300 करोड़ का फायदा होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को गोरखपुर के बाढ़ग्रस्त इलाकों के दौरे के बाद गोरक्षनाथ मंदिर में शहर के प्रमुख पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बेहद साफगोई से लगभग हर मौजू विषय पर अपनी राय साझा की। योगी ने कहा कि एक अक्तूबर से खनन शुरू होगा। इससे निर्माण सामग्री की महंगाई नियंत्रित की जाएगी। अभी अस्थायी तौर पर छह महीने के लिए खनन के 100 पट्टे दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने ओवर लोडिंग पर सख्ती जारी रखने की बात फिर दोहराई। उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग से सड़कों को काफी नुकसान हो रहा था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। इन्हें भरने की कार्रवाई चल रही है। अकेले पुलिस विभाग में एक लाख 50 हजार पद खाली पड़े हैं। पहले चरण में 60 हजार पद भरे जाएंगे, क्यों कि एक बार में भर्ती और सही प्रशिक्षण की इतनी ही क्षमता है। बाकी पद बाद में भरे जाएंगे। विकास प्राधिकरणों में भ्रष्टाचार पर सीएम ने कहा कि पहली बार ट्रांसफर पॉलिसी लाई गई है। नीचे से ऊपर तक ट्रांसफर किए जा रहे हैं। नक्शा पास कराने की व्यवस्था भी जल्द ही ऑनलाइन होगी। मुख्यमंत्री ने नई औद्योगिक नीति को क्रांतिकारी बताया और कहा कि अब युवाओं को बाहर जाकर नौकरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यूपी में उद्योग लगेंगे और यहीं नौकरी मिल जाएगी।
एक अक्तूबर में लखनऊ में ई-ऑफिस
मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ के सभी दफ्तर एक अक्तूबर से ई-ऑफिस कहलाएंगे। सारा काम ऑनलाइन होगा। ई-ऑफिस से भ्रष्टाचार खत्म होगा।
जल परिवहन को बढ़ावा देगी सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जल परिवहन सेवा को बढ़ावा देगी। राप्ती, घाघरा और सरयू नदी को जल परिवहन सेवा से जोड़ने की योजना है। ऐसा हुआ तो नदियां अपने पुराने स्वरूप में वापस आ पाएंगी। क्योंकि बाढ़ और कटान की वजह से अधिकतर नदियों में सिल्ट जमा हो गए हैं। कुछ नदियों से सिल्ट निकालने की संभावना पर भी काम चल रहा है।
नदियों को जोड़ने का काम जारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगरा में यमुना नदी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। यमुना को चंबल नदी से जोड़ा जा सकता है। चंबल नदी का पानी काफी मीठा है। इसको पेयजल योजना से भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। शारदा नदी से गोमती नदी को जोड़ने की दिशा में भी काम हो रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की देश के स्तर पर नदियों को जोड़ने की योजना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें राज्यों की सहमति बेहद जरूरी है। बुंदेलखंड में यमुना को चंबल से जोड़ने को लेकर मध्य प्रदेश की अपनी सोच और समस्या है।