गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिकल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायरोलॉजी (एनआईबी) विभाग के पीसीआर मशीन में शुक्रवार की सुबह अचानक आग लग गई। पहले तो विभाग के अधिकारियों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया। फायर फाइटिंग सिस्टम के फेल हो जाने पर फायर विभाग को सूचना दी गई। थोड़ी देर में मौके पर पहुंचे अग्निशमन दल ने आग पर काबू पाया।
मेडिकल कॉलेज के रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) भवन के दूसरे मंजिल पर बने एनआईबी की पीसीआर लैब की मशीन में कर्मचारी सैंपल इकट्ठा कर रख रहे थे। लैब में एसी चल रहा था। सुबह अचानक सवा दस बजे के करीब शार्ट सर्किट से एसी में आग लग गई। धीरे-धीरे लपटें बढ़ती गई। आग लैब में रखी पीसीआर मशीन तक पहुंच गई। पास के लैब में काम कर रहे लोगों ने पीसीआर से धुआं उठता देखा तो हल्ला मचाया। भाग कर लोग भवन से बाहर आए। उसी बीच स्टाफ ने अग्निशमन विभाग को फोन कर जानकारी दी।
40 मिनट तक प्राचार्य को नहीं थी जानकारी
मेडिकल कॉलेज के एक महत्वपूर्ण विभाग में सुबह आग लग गई और विभाग के अधिकारियों ने प्राचार्य को उसकी सूचना देना मुनासिब नहीं समझा। 10:49 बजे प्राचार्य से फोन पर बात की गई तो उन्होंने ऐसी घटना की जानकारी से अनभिज्ञता जताई।
फायर सिस्टम काम नहीं किया
मेडिकल कॉलेज के पीसीआर लैब में आग लगने के बाद पहले लोगों ने मेडिकल कॉलेज के फायर फाइटिंग सिस्टम से उस पर काबू पाने की कोशिश की। चर्चा थी कि कोई भी कर्मचारी सिलिंडर का ढक्कन तक नहीं खोल सका। उसके बाद लोगों ने पानी डालकर आग को बढ़ने से रोका। उसी बीच अग्निशमन दल की गाड़ी भी पहुंच गई। तब आग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सका। शुक्र है कि जिस समय आग लगी, वहां कर्मचारी मौजूद नहीं थे।
प्रभावित होगा जेई विषाणुओं पर शोध
एनआईबी की पीसीआर मशीन के जलने से बड़ा नुकसान हुआ है। बीते दिनों इंसेफेलाइटिस वार्ड में बच्चों की मौत के बाद बड़ा हंगामा मचा था। सरकार ने इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए आरएमआरसी की निगरानी में जेई के विषाणुओं के सैंपल की जांच शुरू की थी। पूर्वांचल का यह एकमात्र पहला संस्थान था, जहां एक लैब में पांच पीसीआर मशीन थी। जेई के विषाणुओं पर शोध करने में अब परेशानी आएगी।
छह माह में चौथी बार लगी आग
मेडिकल कॉलेज में लगभग छह माह पहले प्राचार्य दफ्तर के दूसरे मंजिल पर आग लग गई थी। कुछ दिन बाद ही प्राचार्य कक्ष में आग लगने से काफी कुछ बर्बाद हो गया था। प्राचार्य कक्ष सामान्य होने के बाद फिर से उसे तैयार किया गया। उसके कुछ ही दिनों बाद प्राचार्य कक्ष के पास के कमरे में आग लग गई थी। एक बार फिर शुक्रवार को आग लग गई। आग लगने की सभी घटनाओं में फायर सिस्टम का खराब होना सामने आया।