लेट नहीं होंगी गोरखपुर से गुजरने वाली 140 ट्रेनें
हर रूट का विकल्प तैयार, हादसा होने पर दूसरे रूट से ट्रेनें निकाली जा सकेंगी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। आने वाले दिनों में गोरखपुर से होकर जाने वाली करीब 140 ट्रेनें ट्रैक खाली न होने की वजह से लेट नहीं होंगी। हादसा होने की स्थिति में भी इन्हें रास्ता बदलकर चलाया जा सकेगा। यह रेलवे की ओर से सभी मेन रूटों के विकल्प तैयार करने से संभव हो सकेगा। अप्रैल 2019 तक छपरा से लखनऊ तक तीन-चार वैकल्पिक रूट तैयार हो जाएंगे। दो साल में इनका विद्युतीकरण भी हो जाएगा है। इसके बाद मालगाड़ियों को अलग रूट से चलाने की तैयारी है।
गोरखपुर से बिहार जाने के लिए मेन रूट सीवान-छपरा है। अब इसका बाईपास भी तैयार हो गया है। छपरा-थावे-कप्तानगंज के रास्ते ट्रेनें गोरखपुर आ जाएंगी। वहीं कप्तानगंज से दूसरा रूट वाल्मिकीनगर-नरकटियागंज (205 किमी) है। इसका विद्युतीकरण हो चुका है। मार्च में कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) का निरीक्षण भी प्रस्तावित है। सीआरएस ने गोरखपुर से वाल्मिकीनगर तक ट्रेन चलाने को पहले ही हरी झंडी दे दी है। यानी अप्रैल से इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेनें चल सकेंगी। यह भी बिहार से आने वाली ट्रेनों का वैकल्पिक रूट होगा।
-
बाराबंकी से मैलानी रूट पर भी प्रस्तावित
बाराबंकी से मैलानी रूट भी ब्रॉड गेज के लिए प्रस्तावित है। ऐशबाग से सीतापुर रूट का काम पूरा होने के बाद रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने दो दिन पहले ही ट्रेनों को रवाना किया था। सीतापुर से लखीमपुर तक रेलवे ट्रैक पर काम हो चुका है। लखीमपुर से मैलानी तक काम बाकी है। इसका प्रस्ताव भी तैयार है। इस वित्तीय वर्ष में बजट मिलने की उम्मीद है।
कोट
सभी मेन रूट का विकल्प तैयार किया जा रहा है। बिहार से गोरखपुर आने के लिए विकल्प के तौर पर दो रूट उपलब्ध होंगे। दो से तीन साल में सभी रूट का विद्युतीकरण का काम भी पूरा हो जाएगा। - संजय यादव, सीपीआरओ एनईआर