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राजेश्वरी हत्याकांड: पिता के इलाज के दौरान ही डॉक्टर से बढ़ी थीं नजदीकियां

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Rajeshwari murder
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 राखी के पिता हरेराम श्रीवास्तव बिजली विभाग से इंजीनियर पद से रिटायर हुए थे। 2001 से ही उनकी तबीयत खराब रहती थी। 16 मई 2006 को ब्रेन हैमरेज होने पर उन्हें आर्यन हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिवार बिलन्दपुर में रहता था जो हास्पिटल से नजदीक था। अस्पताल आने-जाने के दौरान डॉक्टर और राखी के बीच नजदीकियां बढ़ गई थीं। इसके बाद दोनों का मिलना-जुलना शुरू हो गया। एसटीएफ के मुताबिक जब दोनों की जान-पहचान हुई तो डॉ. डीपी सिंह की शादी हो चुकी थी, मगर उन्होंने राखी को दूसरी पत्नी बना लिया था।
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हास्पिटल में हुई मुलाकात कब रिश्ते में बदल गई, इसका सटीक अंदाजा घरवालों को भी नहीं था। 2011 में गोंडा के एक कॉलेज में राखी ने बीएड में दाखिला लिया था। इसी दौरान डॉक्टर से उसकी नजदीकी और बढ़ गई। बड़े भाई अमर प्रकाश श्रीवास्तव के मुताबिक गोंडा से परीक्षा देकर राखी घर लौटी थी। इसी दौरान उसके पर्स से पोस्टपेड मोबाइल सिम कार्ड की रसीद गिरी थी। इसका इस्तेमाल राखी ही करती थी, जबकि सिम कार्ड डॉ. डीपी सिंह के नाम पर था। इसके बाद घर में विवाद हुआ और राखी को डांटा गया। विवाद के बाद राखी घर छोड़कर चली गई, फिर कभी लौटकर नहीं आई।

राखी ने छह महीने तक चलाई थी कोचिंग
हरिओम नगर में राखी किराए के कमरे में जेएमएस नाम से कोचिंग चलाती थी। हालांकि बाद में कोचिंग इसे बंद कर दिया गया।

दो बार डॉक्टर पर दर्ज कराया था केस
राखी 2011 में डॉ. डीपी सिंह के खिलाफ कैंट थाने में दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। इसके बाद कोतवाली थाने में भी उसने मारपीट की शिकायत की थी। 2014 में लखनऊ के चिनहट थाने में राखी के अपहरण का केस दर्ज कराया गया था। इस मामले की तहरीर राखी के भाई ने दी थी।
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बदनामी की वजह से बेच दिया था घर
भाई अमर ने बताया कि राखी ने परिवार को शर्मसार किया था। इस कारण बिलन्दपुर का मकान 2016 में बेचना पड़ा। इसके बाद परिवार तिवारीपुर इलाके में मकान लेकर रहने लगा।
 

चार अक्तूबर को व्हाट्सएप ग्रुप से लेफ्ट होने पर हुआ संदेह

24 जून को दूसरे पति मनीष ने राखी के लापता होने की सूचना फोन पर दी थी। राखी के भाई के मुताबिक इसके बाद ही केस दर्ज कराया गया था। चूंकि वह मनीष के साथ ही गई थी, इस वजह से संदेह उसी पर था। रिश्तेदारों के एक व्हाट्सएप ग्रुप से अचानक चार अक्तूबर की रात 11:30 बजे राखी के लेफ्ट होने की जानकारी मिली, जिसके बाद पुलिस से संपर्क साधा गया था।

अक्सर लापता रहती थी राखी
भाई के अनुसार राखी केघर छोड़ने के बाद हम भाई, बहनों ने उससे रिश्ता तोड़ लिया था, लेकिन लगाव था। इस कारण मैं, खोज खबर लेता रहता था। वह घर से 20-20 दिन तक लापता रहती थी। इसी वजह से उसके लापता होने पर ज्यादा खोजबीन नहीं की गई।

शाहपुर आवास पर हुई थी फायरिंग
डॉक्टर के दिलाए गए मकान पर एक बार फायरिंग हुई थी। तब राखी ने डॉ. डीपी सिंह पर फायरिंग कराने का आरोप लगाया था लेकिन केस दर्ज नहीं कराया था। इस वजह से मामला दब गया।

पति पर बना रही थी घर लिखने का दबाव
राखी शाहपुर के जिस मकान में रहती थी वह डॉक्टर के नाम पर है। ऐसे में वह डॉक्टर पर घर अपने नाम करने के साथ ही नकद रुपये की मांग कर रही थी। इसी वजह से आजिज आकर डॉक्टर ने उसकी हत्या की योजना बनाई। राखी दो भाई, दो बहनों में सबसे छोटी थी।

नेपाल पुलिस कर सकती है पूछताछ
राखी की हत्या का मामला नेपाल में भी दर्ज है। उसने अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करके जांच शुरू की थी। इस वजह से नेपाल पुलिस गोरखपुर आएगी। पुलिस अधिकारी डॉ. डीपी सिंह के साथ उनके सगे-संबंधियों से भी पूछताछ कर सकते हैं।

कई शादियों की चर्चा
एसटीएफ के मुताबिक राखी ने कई शादियां की थीं। डॉ. डीपी सिंह और मनीष से शादी की जानकारी घरवालों को भी थी लेकिन नौ और लोगों से शादी की चर्चा है।
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राजदार शुक्ला की तलाश

राखी हत्याकांड में पुलिस को डॉ. डीपी सिंह के राजदार शुक्ला की तलाश है। पुलिस का कहना है कि शुक्ला प्रभावशाली है। वह केस मोड़ने की फिराक में थे लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। इससे पहले ही हत्याकांड का एसटीएफ ने पर्दाफाश कर दिया।

कई बार बनाई थी हत्या की योजना
एसटीएफ के मुताबिक एक साल से कई बार राखी की हत्या की योजना बनाई गई थी। राखी को लेकर डॉक्टर नेपाल भी गए थे। एक बार तो साथ में पेट्रोल भी ले गए थे लेकिन मकसद पूरा नहीं हो सका।

राखी को 250 मीटर की ऊंचाई से फेंका गया था
राखी को पोखरा में 250 मीटर की ऊंचाई से फेंका गया था। एसटीएफ के मुताबिक इसकी पुष्टि नेपाल में हुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुई है। इतनी ऊंचाई से फेंकने का मकसद था कि उसका शव क्षत-विक्षत हो जाए और पहचान न हो सके। आरोपियों ने कुछ समय बाद तक राखी का मोबाइल चालू रखा गया था।
गिरफ्तारी करने वाली टीम में सत्य प्रकाश सिंह, धनंजय सिंह, अनूप राय, जसवंत सिंह, महेंद्र सिंह सहित 30 सदस्य शामिल थे।

पारिवारिक प्रकरण है : आईएमए
डॉ. डीपी सिंह की गिरफ्तारी की चर्चा सुनी। लेकिन घटना क्या है, इस बारे में पूरी जानकारी नहीं है। इतना पता चला है कि यह उनका पारिवारिक प्रकरण है। पूरी जानकारी के बाद ही इस मामले में कुछ कहना ठीक होगा।
- डॉ. एपी गुप्ता, अध्यक्ष, आईएमए गोरखपुर
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