गोंडा। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की कवायद पर विभाग की लापरवाही भारी पड़ रहा है। मरीजों को स्थानीय स्तर पर जांच की सुविधा देने के लिए जिले की पांच सीएचसी में शुरू की गई डिजिटल एक्स-रे सेवा अब बंद हो चुकी है।
इससे जहां मरीजों को नि:शुल्क जांच की सुविधा मिल रही थी, वहीं चिकित्सकों को इलाज करने में सहूलियत भी मिलती थी। तीन महीने से एक्स-रे जांच की सेवा बंद होने से पांच ब्लॉकों की 15 लाख आबादी को मिलने वाली सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। मरीजों को बाहर से जांच कराने में 300 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, कई गरीब मरीज हैं जो निजी केंद्रों पर जांच कराने में सक्षम नहीं रहते।
सीएचसी बेलसर, नवाबगंज, तरबगंज, कर्नलगंज, मनकापुर में मार्च से जांच की सुविधा बंद हो गई है। डिजिटल एक्स-रे मशीन तो लगी है, लेकिन यहां के लोगों को एक्स- रे के लिए बाहर निजी खर्च पर जांच करानी पड़ रही है।
मार्च से एक्स- रे की सुविधा पांच सीएचसी में बंद चल रही है और इससे करीब 15 लाख की आबादी को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना संक्रमण से जंग जिन मरीजों ने जीत ली है। उन्हें तो सेहत की फिक्र है ही, हर ब्लाक में महीने में एक हजार के करीब लोग ऐसे हैं जो इलाज कराते हैं।
सीएचसी के साथ ही पीएचसी में इलाज कराने वालों के साथ ही निजी चिकित्सकों के यहां लोग बीमार होने पर इलाज कराते हैं। सीएचसी बेलसर, नवाबगंज, तरबगंज, कर्नलगंज, मनकापुर पर मरीजों की सुविधाओं को देखते हुए एक निजी पैैथोलॉजी संस्था के माध्यम से डिजिटल एक्स- रे की सुविधा शुरू हुई थी। मार्च 2021 में संस्था को खर्च का भुगतान नही मिल सका।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से धनराशि न दिए जाने पर संस्था ने मार्च से ही एक्स- रे का संचालन बंद कर दिया है। इसके बाद से मशीनें जस की तस सीएचसी में खड़ी हैं। उनका उपयोग नहीं हो रहा है और मरीजों को बाहर से जांच करानी पड़ रही है।
सीएचसी में लगे डिजिटल एक्स- रे मशीन से जांच होने पर मरीजों को नि: शुल्क सुविधा मिल रही थी। अब पांचों सीएचसी पर जांच बंद है और इसके कारण लोगों को निजी पैथोलॉजी पर जांच करानी पड़ती है। ऐसे में डिजिटल जांच कराने पर तीन सौ रुपये प्रति मरीज व सामान्य जांच पर दो सौ रुपये प्रति मरीज से शुल्क देना पड़ता है।
इससे गरीब मरीजों को असुविधा का सामना तो करना ही पड़ रहा है, उल्टे उनके इलाज का खर्च भी बढ़ जा रहा है। माना जा रहा है कि सीएचसी में जांच शुरू हो जाए तो मरीजों को समय के साथ ही आर्थिक बचत भी होगी। एक्स-रे ऑपरेटर प्रदीप ने बताया कि वह ड्यूटी पर रोज आते हैं, लेकिन तीन माह से जांच ही बंद चल रही है।
सीएचसी पर हर रोज 50 से 100 लोग इलाज के लिए आते हैं। अधिकतर पेट की बीमारी से ग्रस्त भी रहते हैं। पेट की कई तरह की बीमारियों के लिए डिजिटल एक्से- रे जरूरी है। इसी तरह सीने में दर्द होने या फिर हड्डी से जुड़ी बीमारी आदि के लिए एक्स- रे महत्वपूर्ण है। यही नही ग्रामीण क्षेत्र होने से अक्सर सड़क हादसों या फिर चोट लगने से बीमार हुए लोग भी दवा कराने आते हैं।
उनकी भी एक्स- रे जांच करानी होती है। ऐसे में अब अधिकतर तो बाहर से करा लेते हैं और जिनके पास पैसे की कमी है वह बिना जांच कराए ही दवा लिखवा लेते हैं। सीएचसी के चिकित्सक भी जांच के लिए दबाव नही बना पा रहे हैं। इस तरह की समस्याओं से हर दिन लोगों को गुजरना पड़ रहा है।