कारगिल युद्ध की यादें साझा करते पूर्व सैनिक विजय सिंह कारगिल। - संवाद
गोंडा। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध में अटल इरादों से पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने वाले विजय सिंह कारगिल सिस्टम से हार रहे हैं। विजय कहा कि वर्ष 2005 में तत्कालीन डीएम ने पीडी बंधे के समीप सेमरी के शिवागंज बाजार में उन्हें साढ़े तीन बिस्वा जमीन का पट्टा दिया था। उस वक्त आर्थिक संकट था, इस वजह से वह जमीन पर कुछ नहीं कर सके। अब डेढ़ साल से वह पट्टे की जमीन के लिए दौड़ रहे हैं। अब कहा जा रहा है कि जिस जगह पर पट्टे की बात कही जा रही है, वह खनन क्षेत्र है। इसके एवज में कहीं अलग जमीन ले लीजिए, जबकि वह जमीन खाली पड़ी है।
बकौल विजय सिंह, कई बार अफसरों से भी मिले, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। यही नहीं, वर्ष 2007 में पेट्रोलियम के अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया था। उन्हें पेट्रोल पंप देने का सब्जबाग दिखाया गया। इसके लिए शांतिनगर कटरा, गोंडा शहर व लकड़मंडी में पेट्रोल पंप के आवंटन का प्रस्ताव दिया गया। बाद में उससे भी हाथ खींच लिए गए। विजय कहते हैं कि दर्द तो बहुत है, लेकिन देशसेवा का जज्बा कम नहीं है।
कारगिल युद्ध में बहादुरी से लड़े थे विजय
बेलसर ब्लॉक के ऐली परसौली गांव में जन्मे विजय सिंह कारगिल युद्ध के समय जम्मू कश्मीर के बारामूला में 16 ग्रेनेडियर रेजिमेंट में बतौर नायक तैनात थे। एमएमजी, एजीएल व एके 47 कोर्स क्वालीफाइड विजय को यूनिट के साथ दराज सेक्टर भेजा गया। कारगिल हिल के पास टाइगर हिल के सामने व नीचे की ओर दराज सेक्टर है। कमांडिंग ऑफिसर व दलनायक मेजर अजीत सिंह के साथ युद्ध भूमि में उतरने का आदेश मिला। दराज सेक्टर में अधिकारियों ने नक्शे से वहां की भौगोलिक स्थिति के बारे में समझाया। एक माह की लड़ाई में उनकी यूनिट के 12 जवान शहीद हो गए और 22 जख्मी हुए। 5100 नंबर की पहाड़ी पर निर्णायक युद्ध में विजय के दाहिने पैर में गोली लग गई। इसके बावजूद लड़ाई जारी रखी। विजय 14 घंटे तक युद्ध मैदान में ही पड़े रहे। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया। तीन साल तक उनका इलाज चला। उनका दाहिना पैर साढ़े सात सेंटीमीटर छोटा हो गया है।
देश के लिए आज भी बुलंद इरादा
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन करते हुए विजय सिंह कारगिल ने कहा कि देश के लिए आज भी इरादा बुलंद है। सेना ने जिस साहस का परिचय दिया है, वह उसके शौर्य का प्रतीक है। कहा कि देश के लिए आज भी वह तैयार हैं। जब भी जरूरत होगी, वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।