गोंडा। कोमल हैं कमजोर नहीं, शक्ति का नाम ही नारी है... इस गीत की सार्थकता को गांवों में लेनदेन करने के लिए नियुक्त बीसी सखी संध्या ने कर दिखाया है। तरबगंज के दुफेडिया गांव की बीसी सखी संध्या देवी ने न सिर्फ गांव के लोगों को बैंकिंग सुविधाएं दी, बल्कि एक नई पहल करके मिसाल पेश की। मनरेगा श्रमिकों को उनके कार्यस्थल पर जाकर भुगतान किया, जिससे श्रमिकों को बैंक जाने से छुटकारा मिला। इसकी सराहना डीएम उज्जवल कुमार व सीडीओ गौरव कुमार ने की।
राष्ट्रीय आजीविका मिशन से बीसी सखी के चयन की शुरुआत हुई। 1214 पंचायतों में से 859 बीसी सखी नियुक्त हुईं, वह गांवों के लोगों के लिए संजीवनी से कम नहीं हैं। विभिन्न योजनाओं के पेंशनरों के साथ ही अन्य सूक्ष्म भुगतान के लिए लोगों को न तो एटीएम खोजना पड़ रहा है और न उन्हें बैंक का चक्कर लगाना पड़ रहा है। गांव में बैंक की सुविधाएं मिल रहीं। सर्वाधिक फायदा महिलाओं को मिल रहा है, जिनके परिवार के लोग बाहर रहते हैं, और खातों में पैसा भेजते हैं। उन्हें घर से जाने में दिक्कत होती थी। घर बैठे ही निकासी हो रही है। इससे बीसी सखी को गांव में काम करके कमाई भी हो रही है।
संध्या ने एक करोड़ 23 लाख 85 हजार रुपये का लेने-देन करके एक करोड़ का आंकड़ा पार कर दिया है। उन्होंने 23 हजार रुपये बतौर कमीशन की कमाई की है। संध्या कहतीं हैं कि महिलाओं के लिए बहुत अच्छी पहल है, इससे महिलाओं को गांव में काम भी मिल गया है। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं की जानकारी मिली है। गांव की जिन महिलाओं का बैंक में खाता नहीं है, उनका खाता भी खुलवाया गया है। हर महिला को बैंक की जानकारी दी जा रही है। मनरेगा के श्रमिकों को अपनी मजदूरी निकालने बैंक जाना पड़ता था। जिससे उनके एक दिन काम का नुकसान भी होता था। अब वह काम भी करते रहेंगे और उन्हें मजदूरी का भुगतान भी मिल जाएगा। (संवाद)
वजीरगंज की रीमा दूसरे नंबर पर
तरबगंज की संध्या की तरह वजीरगंज के माथेपुर की रीमा मौर्य बैंकिंग सुविधा में आगे बढ़ रहीं हैं। उन्होंने एक करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। एक करोड़ 10 लाख 21 हजार का लेनदेन किया है। उन्होंने बीस हजार की कमाई की है। उनका भी कहना है कि वह कार्य को लगातार बढ़ा रहीं हैं। लोगों को जोड़कर उनके जरूरत की राशि उपलब्ध करा रहीं हैं।
फैक्ट फाइल
- जिले में पंचायतों की संख्या- 1214
- कार्यरत बीसी सखी - 859
- मनरेगा के श्रमिक - दो लाख
- अब हुआ लेनदेन - बीस करोड़
- बीसी सखी को मिला लाभ - करीब दो लाख
बीसी सखी की ओर से किए जा रहे कार्य से ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर बैंकिंग की सुविधाएं मिलीं हैं। मनरेगा श्रमिकों का समय बचा है। साथ ही बीसी सखी के रूप में महिलाओं को रोजगार भी मिला है। नीलांबुज, जिला प्रबंधक आजीविका मिशन