गोंडा/ खोंडारे। जिले के अति पिछड़े ब्लाक बभनजोत की तीन ग्राम पंचायतों में पांच पानी की टंकियों से लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए पेयजल मिशन से पानी की टंकी तो बनी, लेकिन उसका लाभ लोगों को नहीं मिला। गांव के हजारों लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 30 करोड़ रुपये से पांच पानी की टंकियां बनाई गई थीं। लेकिन विभागीय लापरवाही से बिना प्यास बुझाए इन टंकियों का संचालन बंद हो गया। अब अधिकारी तकनीकी खामियों का रोना रो रहे हैं। पानी की टंकियों की स्थापना के दौरान ही ध्यान नहीं दिया गया जिससे अब टंकी बेकार व बंद है।
ग्रामीण राष्ट्रीय पेयजल योजना से वर्ष 2014 में स्वीकृत हुईं पानी की टंकियों का निर्माण तो वर्ष 2016 में पूरा हो गया। वर्ष 2018 में घारीघाट में पानी की टंकी शुरू की गई। इस टंकी पर 1.42 करोड़ रुपये की लागत से पानी की टंकी बननी थी, जिसमें 1.28 करोड़ खर्च करके टंकी बनाई गई और 5 मार्च 2018 में टंकी को चालू करके हैंडवोअर कर दिया गया। तकनीकी खामियों के कारण अब इससे जलापूर्ति बंद हो गई। इसी तरह कूकनगर ग्रंट पूर्वी व पश्चिमी में 13 करोड़ 85 लाख 98 हजार रुपये की लागत टंकी का निर्माण हुआ। टंकी को हैंडओवर वर्ष 2018 में किया गया। अब यह भी बंद है, इसी तरह केशवनगर ग्रंट पश्चिमी और पूर्वी के लिए 15 करोड़ 9 लाख 74 हजार रुपये से ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया गया। टंकियों का निर्माण भी हुआ लेकिन टंकियों से लोगों को अब पानी नहीं मिल पा रहा है।
कहीं की बिजली कटी तो कहीं पाइप फटी
पानी की टंकी का संचालन कई कारणों से बंद है। घारीघाट की टंकी की पाइप दो किमी तक फट गई है। बताया जा रहा है कि लोक निर्माण विभाग ने सड़क निर्माण के दौरान पाइप तोड़ दिया, इससे सप्लाई बंद हो गई। इसके अलावा कूक नगर ग्रंट की टंकी बिजली बिल बकाया है और इसका कनेक्शन काट दिया गया है। इस टंकी पर 2.50 लाख रुपये का बकाया है। केशवनगर की टंकी में बिजली कनेक्शन ही बकाया में काट दिया गया है। इस तीनों गांवों की पांचों टंकियों का संचालन ठप्प है।
तीन पंचायतों के 440 गांवों में एक साल से ठप्प है सप्लाई
तीन पंचायतों में पांच पानी की टंकी से 440 गावों में पानी की सप्लाई होनी थी। इससे करीब 30 हजार की आबादी को शुद्ध पानी मुहैय्या कराने की योजना तैयार हुई। निर्माण में ही तीन साल से अधिक का समय लग गया। लेकिन पांचों टंकियों की सप्लाई बंद होने से अब लोगों के निराशा ही हाथ लगी है। पानी की टंकियों के शुरू होने में कई रुकावटें भी हैं। बिजली के बिलों की समस्या तो है ही पाइप टूटने से फिर से बजट पास कराना आसान नहीं दिख रहा है।
ग्रामीणों को अब शुद्ध पेयजल की सुविधा लग रहा सपना
ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल की सुविधा अब सपना ही लग रहा है। घारीघाट के डॉ. प्रभाकर पांडेय कहते हैं कि एक साल से पानी नही मिल रहा है। करोड़ों का बजट खर्च होने के बाद भी सुविधा न मिलना गंभीर मामला है। कूकनगर ग्रंट के बब्बू चौधरी ने कहा कि अब तो पानी मिलना सपना ही लग रहा है। उम्मीद तो जगी थी लेकिन साकार होती नहीं दिख रही है। अखिलेश वर्मा ने बताया कि विभाग और पंचायत दोनो पेयजल योजना को लेकर गंभीर नही दिख रहे हैं। केशव नगर ग्रंट के अजय सिंह ने कहा कि करोड़ों की योजना है टंकी बंद है अधिकारियों को गंभीरता से कार्य करना चाहिए। टंकी चालू कराना चाहिए। इसी गांव के भूपेन्द्र यादव कहते हैं कि लोगों के लिए अच्छी सुविधा थी लेकिन शुरुआत से ही अधिकारी लापरवाही करते रहे। रविन्द्र वर्मा ने भी कहा कि टंकी को फिर से शुरू करके जनोपयोगी बनाया जाना चाहिए।
टंकियों के बंद होने की जानकारी है। घारीघाट में पाइपलाइन टूट गया, स्टीमेट तैयार कर स्वीकृत कराया जाएगा। अन्य में बिजली की समस्या है, पंचायतों को बिल जमा करना चाहिए था। विभाग को पत्र लिखा जाएगा। टंकियों को जल्द शुरू करने की कार्रवाई होगी। -मुकीम अहमद, अधिशाषी अभियंता जल निगम