एल्गिन-चरसडी बांध की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही। घाघरा की धारा बांध से सट कर बहने लगी है। अब अगर घाघरा का जलस्तर बढ़ा तो बंधे को बचाना मुश्किल हो जाएगा। नदी और बांध के बीच की खाली पड़ी करीब 11 सौ बीघा भूमि घाघरा निगल चुकी है। धीरे-धीरे घट रहे पानी से बुधवार को भी बांध में कटान का सिलसिला जारी रहा।
चार से छह मीटर चौडे़ एल्गिन-चरसड़ी बांध का दायरा घाघरा की कटान के बाद अब मात्र दो से ढाई मीटर ही बचा है। पहले नदी और बांध के बीच करीब 100-200 मीटर तक का फासला होता था। लेकिन नदी के बहाव में आए 32 डिग्री के बदलाव से नदी का पानी ठीक बंधे से सटकर बह रहा है। जिससे बंधे को बचाना सिंचाई विभाग के लिए मुश्किल हो गया है।
बीते 24 घंटे के अंतराल पर घाघरा खतरे के निशान से घटते-घटते दो मीटर नीचे आ गई है। लेकिन इसके बाद भी नदी के बहाव में कोई अंतर नहीं दिखाई दे रहा। घट रहे जलस्तर के बीच नदी से थोड़ी-बहुत कटान बुधवार को भी जारी रही। जिसके लिए पूरे दिन सिंचाई विभाग का अमला बंधे की मजबूती में लगा रहा। बंधे के लिए सबसे बड़ा खतरा नदी में उठने वाली भंवर होगी। जानकारों की मानें तो भंवर उठने पर घाघरा नदी चार मीटर से ज्यादा भूमि को काटकर अपनी आगोश में समेट लेती है, जिससे यहां रहने वाले लोगों में बेचैनी बनी हुई है।
बंधे की हो रही निगरानी
बंधे की निगरानी के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारी लगातार कैंप कर रहे हैं। एल्गिन-चरसड़ी बांध के संवेदनशील हिस्से की मजबूती के लिए उसके पीछे काम तेजी से चल रहा है। सहायक अभियन्ता अशोक कुमार की मानें तो घाघरा नदी का पानी बंधे से सटकर बह रहा है। उनका कहना है कि नदी के पानी में प्रति घंटे एक सेमी की गिरावट आ रही है। बंधे के बचाव के लिए उनका काम दिन-रात जारी है। प्रयास यही है कि बंधे को किसी भी सूरत में कटने न दिया जाए।