कटान के मद्देनजर बांध को बचाने की कवायद युद्धस्तर पर चल रही है। कटे हुए बांध के किनारे लकड़ी की बल्लियाों को गाड़कर उसमें बालू की बोरियां व पत्थर के टुकड़े भरवाए जा रहे हैं जिसे जलस्तर बढ़ने पर बांध के बचे हुए हिस्से को कोई नुकसान न हो।
घाघरा नदी का जलस्तर शुक्रवार को स्थिर रहा। इससे प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आसपास के लोगों ने राहत की सांस ली। साथ ही नदी की स्थिरिता को देखते हुए बांध के बचे हुए हिस्से को बचाने का प्रयास भी युद्धस्तर पर शुरू किया गया है। गुरुवार की देर शाम पत्थर के टुकड़े मंगाने के साथ बालू भरी बोरियों को लगाने के लिए सैकड़ों मजदूरों को लगाया गया। यह कार्य गुरुवार रात भर चला। इसके साथ ही परखो-पाइन लगवाने का भी काम करवाया जा रहा है। बालू भरी बोरियों के अलावा झाड़-झंखाड़ से पायलिंग करवाई जा रहा है। ताकि नदी के पानी से बांध की मिट्टी न बहे। वहीं दूसरी तरफ जिस स्थान पर बांध में कटान हुई थी वहां पोकलैंड मशीन से दो मीटर बांध की चौड़ाई बढ़ा कर उसे मजबूत करने का कार्य चल रहा है। नदी के जलस्तर के शांत रहने तक दोनों काम पूरे हो जाते हैं तो लोगों की चिंता कुछ हद तक कम हो सकती हैं। बाढ़ की आशंका के मद्देनजर तहसील क्षेत्र की 11 चौकियों को एलर्ट किया गया है। इन स्थानों से अगर बाढ़ आती है तो क्षेत्र के 72 गांवों में राहत सामग्री पहुंचाने का काम किया जाएगा।