गोंडा। बाबू ईश्वर शरण मेडिकल कॉलेज में पिछले करीब तीन महीने से इंट्राऑक्यूलर लेंस (आईओएल) और विस्को की आपूर्ति ठप होने से मोतियाबिंद के ऑपरेशन लगभग बंद हैं। आंखों की रोशनी लौटने की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों की जांच तो हो रही है, लेकिन जरूरी सामग्री उपलब्ध न होने से उन्हें बिना ऑपरेशन कराए वापस लौटना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज की नेत्र ओपीडी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सक जांच के बाद ऑपरेशन की सलाह तो दे रहे हैं, लेकिन लेंस उपलब्ध न होने के कारण ऑपरेशन की तारीख नहीं दी जा पा रही है। इससे दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
गोड़वा निवासी कुन्नू ने बताया कि उनकी दादी के मोतियाबिंद का ऑपरेशन होना है। जांच के बाद अस्पताल ने लेंस उपलब्ध न होने की बात कहकर इंतजार करने को कहा है। वहीं पवन ने बताया कि उनके पिता की आंख में मोतियाबिंद है और चिकित्सक ने ऑपरेशन की सलाह दी है, लेकिन जरूरी सामग्री न होने से इलाज आगे नहीं बढ़ पा रहा।
अंधता निवारण कार्यक्रम भी प्रभावित
जिले में अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत इस वर्ष करीब 12 हजार मोतियाबिंद ऑपरेशन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन अब तक एक हजार ऑपरेशन भी पूरे नहीं हो सके हैं। लंबे समय से लेंस की आपूर्ति बाधित रहने के कारण प्रतीक्षा सूची लगातार बढ़ती जा रही है।
उच्चाधिकारियों को भेजा गया पत्र
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल तिवारी ने बताया कि लेंस और विस्को की कमी के संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। आवश्यक सामग्री की आपूर्ति होते ही मोतियाबिंद सहित अन्य नेत्र शल्य क्रियाएं फिर से शुरू कर दी जाएंगी। तब तक मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है।