गोंडा। मनकापुर तहसील के राजस्व निरीक्षक द्वारा मंगलवार को पैमाइश के नाम पर घूस मांगने का वीडियो वायरल होने से हड़कंप मच गया। राजस्व निरीक्षक बृजेंद्र सिंह ने पैमाइश के लिए आठ हजार रुपये का रेट मनकापुर में तय किया और कहा कि बभनान में पहली बार पैमाइश का रेट 15 हजार रुपये है। गोंडा सांसद से व्यक्ति के जुड़े होने पर कहा कि राजा के आदमी हैं तो हम फाइल बनाने के लिए अपने हिस्से की घूस के एक हजार रुपये नहीं लेंगे। बाकी रकम पैमाइश की टीम में शामिल लेखपालों को देनी पड़ती है।
जिले में भूमि विवाद के तमाम मामले होते हैं। थानों व तहसीलों में होने वाले संपूर्ण समाधान दिवसों में भूमि विवाद के मामले अधिक संख्या में आते हैं। पैमाइश से ही लोगों के भूमि विवाद का निपटारा होता है। इससे तय होता है कि कितनी भूमि किसकी है और कहां पर है। मनकापुर में राजस्व निरीक्षक बृजेंद्र सिंह का वायरल वीडियो पैमाइश का सच भी सामने लाता है। वीडियो में वह एक किसान से साफ-साफ कहते हैं कि यहां पहली पैमाइश पर आठ हजार रुपये लगते हैं। पैमाइश में तीन लेखपालों की टीम लगाई जाती है।
दो-दो हजार रुपये तीनों लेखपालों को देना ही पड़ता है। इस तरह छह हजार रुपये हो जाते हैं। एक हजार रुपये वह फाइल बनाने के पाएंगे। इसके अलावा एक हजार रुपये और खर्च होते हैं। वीडियो में बृजेंद्र सिंह कहते हैं कि वह सबकी तो नहीं लेकिन अपनी घूस इसलिए छोड़ सकते हैैं क्योंकि आप राजा के आदमी हो। इस तरह मनकापुर तहसील में खुलेआम लोगों से पैमाइश आदि काम के रेट तय किए गए हैं। ऐसा तब है जब मनकापुर राजघराने के कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैय्या गोंडा के सांसद हैं और मनकापुर से विधायक रमापति शास्त्री योगी सरकार में समाज कल्याण मंत्री हैं। इसके बाद भी यहां घूसखोरी का आलम ये है कि गरीब व्यक्ति से भी आठ से दस हजार रुपये घूस मांगी जाती है।
घूस मांगने के कई मामलों में ऑडियो और वीडियो वायरल होने पर प्रशासन ने कार्रवाई भी की है। इसके बाद भी घूस मांगने का सिलसिला थम नहीं रहा है। दो साल के भीतर आठ से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। इनमें कार्रवाई भी की जा चुकी है। मनकापुर में वर्ष 2018 में भी पैमाइश के नाम पर लेखपाल बृज किशोर सिंह द्वारा घूस मांगने का वीडियो वायरल हो चुका है और उन्हें निलंबित भी किया गया था। इसके अलावा मार्च 2019 में सदर तहसील में वरासत के नाम पर घूस मांगते लेखपाल मस्तराम वर्मा का वीडियो वायरल हुआ था। इसमें भी एसडीएम ने कार्रवाई की थी।
यही नहीं इसी साल सदर तहसील के बड़गांव क्षेत्र के लेखपाल राम बहादुर पांडेय का भी वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह अधिकारियों के नाम पर घूस मांग रहे थे। उन्हें भी निलंबित किया गया था। इसी तरह कर्जमाफी के लिए किसानों के सर्वे के दौरान करनैलगंज के कुवंरपुर अमरहा में लेखपाल बृजेश कुमार व कोटेदार चेतराम एक-एक हजार रुपये की वसूली कर रहे थे। इसमें भी लेखपाल को निलंबित किया गया था। इसी तरह करनैलगंज के दुबहा बाजार के लेखपाल यज्ञराम यादव का भी वीडियो वायरल हो चुका है, जिसमें वह 500 रुपये घूस ले रहे थे। इस तरह अक्सर राजस्व कर्मियों द्वारा घूस लेने के कई मामले सामने आ चुके हैं और कार्रवाई की जा चुकी है। फिर भी घूसखोरी थम नहीं रही है।
राजस्व कर्मियों के साथ ही पुलिस विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी घूस मांगने में पीछे नहीं हैं। बीते दिनों करनैलगंज के इंस्पेक्टर राजनाथ सिंह व हेड मोहर्रिर शौकत अली घूस मांगने के आरोप में निलंबित हो चुके हैं। घूस मांगने का एक ऑडियो वायरल हुआ था जिसमें हेड मोहर्रिर शौकत अली एक पेड़ कटाने के मामले में इंस्पेक्टर के लिए घूस मांग रहा था। वह कह रहा था पांच हजार रुपये कम थे। इंस्पेक्टर के नाराज होने की बात कहकर वह और रकम मांग रहा था। इसी तरह मोतीगंज के दरोगा विजय यादव का ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें वह मेडिकल रिपोर्ट मैनेज करने के लिए एक व्यक्ति से दस हजार रुपये मांग रहे थे। इन सबके साथ ही बीते साल छपिया में सिपाही भाष्कर तिवारी व जितेंद्र यादव भी घूस मांगने के आरोप में लाइन हाजिर किए गए थे।
उपजिलाधिकारी हीरालाल ने बताया कि राजस्व निरीक्षक का वीडियो वायरल होने की जानकारी हुई है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई है। प्रकरण में कड़ी कार्रवाई की जा रही है।