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सत्यापन व बहानेबाजी ने अटकाई धान की खरीद

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गोंडा के सुभागपुर साधन सहकारी समिति पर बने क्रय केंद्र पर पसरा सन्नाटा। - फोटो : GONDA
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गोंडा। किसानों को धान बेचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। धान खरीद के नियमों से किसान खून के आंसू बहा रहे हैं। ऑनलाइन पंजीकरण के बाद तहसीलों में सत्यापन कराने में पसीना छूट रहा है। किसी तरह सत्यापन हो भी जाए और धान लेकर केंद्रों पर पहुंचते हैं तो उन्हें कई बहानों का सामना करना पड़ता है। हर दिन किसानों को क्रय केंद्रों से लौटाए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। यही नहीं कई क्रय केंद्रों पर ताला लगा रहता है। एसडीएम तरबगंज ने तीन केंद्रों की रिपोर्ट भी भेजी है। पूरे जिले में धान क्रय केंद्र तो 99 खोले गए हैं, लेकिन अब तक 148 किसानों से ही धान की खरीद की गई है। ऐसा तब है जब जिले के चार लाख किसान धान की खेती करते हैं।
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जनपद में भले ही खाद्य विभाग द्वारा धान की फसल खरीदने के लिए क्रय केंद्र बनाकर सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य 1868 रुपये प्रति क्विंटल पर किसानों का धान सुलभता से खरीदने का दावा किया जा रहा हो। लेकिन किसान इन केंद्रों पर धान की फसल बेचने से बच रहे हैं। किसानों के मुताबिक क्रय केंद्रों पर बहाने बताकर वापस कर दिया जाता है। कभी धान की फसल में अधिक नमी का हवाला दिया जाता है तो कभी दाने सही न होने की बात कहकर वापस कर दिया जाता है। जिसके चलते किसानों को बिचौलियों के हाथों सस्ते दामों में धान बेचना पड़ रहा है। जिले में धान खरीदने के लिए 99 केंद्र बनाए गए हैं। लेकिन केंद्रों पर धान खरीदने का काम काफी धीमी गति से चल रहा है। खाद्य विभाग के अनुसार अभी तक 148 किसानों ने अपना 744 टन धान क्रय केंद्रों के माध्यम से बेचा है। वहीं किसानों का आरोप है कि बिचौलियों से मिलीभगत के चलते प्रक्रिया न पूरी होने की बात कहकर किसानों को वापस कर दिया जाता है।
कहीं क्रय केंद्र नहीं तो कहीं खेतों के बीच बना दिया सेंटर
सरकारी धान खरीद केंद्र बनाए जाने में भी अनियमितता की गयी है जिसके चलते किसानों को क्रय केंद्रों तक पहुंच पाने में समस्या हो रही है। इटियाथोक के परसिया बहोरीपुर में खेतों के बीच मे एक कमरे में क्रय केंद्र खोला गया जहां न तो आसानी से किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉली पहुंच सकती न लोगों को केंद्र की जानकारी मिल पाती। जानकारी न होने से परसिया बहोरीपुर, गोशेन्द्रपुर, रमवापुर नायक, चुरिहारपुर, सदाशिव सहित कई गांव के सैकड़ों किसान इटियाथोक धान क्रय केंद्र पर जाने पर विवश हैं। बुधवार को यहां केंद्र खुला था। मगर गोदाम प्रभारी मौजूद नहीं थे।
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बालपुर क्षेत्र में धान क्रय केंद्र न होने से किसान परेशान
एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए वचनबद्ध है। वहीं आसपास धान की केंद्र न होने से किसान मायूस हैं और फसल को औने-पौने दाम में बिचौलियों को बेचने के लिए मजबूर है। विकास खंड हलधरमऊ में धान खरीदने के लिए सरकार ने जो क्रय केंद्र बनाये हैं। वह बालपुर से करीब 15 किलोमीटर दूर पहाड़ापुर क्षेत्र के गौरवा खुर्द में हैं। जहां धान ले जाने में भाड़ा भी अधिक लगेगा। अधिक दूरी होने से किसानों को परेशानी हो रही है। इसलिए किसान अपना धान औने-पौने दाम में बेच रहे हैं। जिससे उनकी आय दोगुना होने के बजाय लागत भी नहीं निकल रही है। परसा गोड़री के किसान गोली सिंह कहते है कि इस बार अधिक बरसात होने से धान की फसल अच्छी थी। पैदावार भी अधिक हुआ है, लेकिन अब धान बेचने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस बार साधन सहकारी समिति परसा गोड़री को क्रय केंद्र नहीं बनाया गया है। पतिसा निवासी किसान सुरेश कुमार मिश्र ने बताया कि इस बार धान बेचने समस्या अधिक है। बालपुर अहिरन पुरवा निवासी माधवराज यादव कहते हैं कि इस बार धान खरीदने के लिए साधन सहकारी समिति ने इनकार कर दिया है। धान क्रय केंद्र बालपुर के आसपास न होने से बालपुर हजारी, हड़ियागाड़ा, चसेनिया, सोनहरा, रेरूवा, परसा गोड़री, पतिसा, भोंका, भटनैया, भरसड़ा, नरसिंहपुर, राजपुर, बीबी सिंह, चौरी, सीकरी, मैजापुर, हलधरमऊ, मोहम्दपुर, कपुरपुर सहित अन्य गांव पंचायत के लोगों को परेशानी होती है।
किस विभाग को कितने केंद्र मिले
विभाग केंद्र
खाद्य विभाग 16
पीसीएफ 38
पीसीयू 37
यूपीएसएसआई 05
मंडी समिति 01
भारतीय खाद्य निगम 02
किसान बोले, फसल बेचने में अटकाये जा रहे रोड़े
पड़री कृपाल के किसान दिनेश पांडेय ने बताया कि क्रय केंद्रों पर धान बेचने में बड़ी समस्या होती है। सर्वर न चलने के कारण अभी तक उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है। पिछले साल का कुछ बकाया पैसा भी भुगतान नहीं किया गया। हलधरमऊ के किसान श्रीश्याम अवस्थी का कहना है कि क्रय केंद्र पर तमाम प्रकार के बहाने बताये जा रहें हैं। क्रय के लिए चयनित धान की किस्म न होने का हवाला देकर वापस कर दिया जाता है। इंद्रापुर के गिरीश शुक्ल का कहना है कि वो धान की बानगी लेकर क्रय केंद्र पर गये थे लेकिन धान में नमी बताकर वापस कर दिया गया। जबकि वो धान को सुखाने के बाद लेकर गए थे। वजीरगंज के देव प्रकाश शुक्ल का कहना है कि उन्होंने रजिस्ट्रेशन तो करवाया लेकिन एक सप्ताह बाद तक अभी सत्यापित नहीं हो सका। जिससे उन्हें धान बेचने में समस्या हो रही है।
जिले में धान क्रय केंद्रों पर किसानों को समस्या न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। सभी केंद्रों पर निगरानी के लिए लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है। वहीं नोडल अधिकारी भी मॉनीटरिंग कर रहे हैं। किसानों से शिकायत मिलने पर संबंधित केंद्र के खिलाफ जांच कर कार्यवाई की जाएगी। -लाल बहादुर गुप्त, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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