गोंडा। चिश्तीपुर मुगलजोत गांव के पास 2019 में विष्णु गोस्वामी की हत्या के मामले में बृहस्पतिवार को न्यायालय ने फैसला सुनाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय राजेश कुमार ने तुफैल व इमरान को हत्या के अपराध में सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोषियों पर 1,26,500 का अर्थदंड लगाया। दो को दोषमुक्त कर दिया।
कोतवाली देहात क्षेत्र के मुगलजोत चिश्तीपुर के रहने वाले राजकुमार गोस्वामी ने 14 मई 2019 को कोतवाली पुलिस को जानकारी दी।
कहा कि उसके ममेरे भाई विष्णु गोस्वामी व महेश गोस्वामी रात 8:30 बजे गोंडा-फैजाबाद मार्ग पर स्थित एक दुकान पर थे। तभी वहां पहुंचे चिश्तीपुर के तुफैल, मास्टर उर्फ रमजान, निजामुद्दीन और खोरहंसा निवासी इमरान ने विवाद शुरू कर दिया।
विरोध करने पर पास में खड़े टैंकर से पेट्रोल निकाल कर आरोपियों ने विष्णु गोस्वामी के ऊपर छिड़ककर आग लगा दी। इससे विष्णु जलने लगा।
वहां मौजूद पंकज कुमार पांडेय, राजकुमार पांडेय व महेश गोस्वामी ने किसी तरह आग बुझाई। गंभीर रूप से जले विष्णु को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
यहां से गंभीर हालत को देखते हुए डाॅक्टरों ने लखनऊ रेफर कर दिया। इलाज के दौरान 19 मई को विष्णु गोस्वामी की मौत हो गई थी।
पाक्सो कोर्ट ने परसपुर के प्रभारी निरीक्षक को किया तलब, मांगा जवाब
संवाद न्यूज एजेंसीगोंडा। नाबालिग से छेड़छाड़ के मामले में कई बार गैर जमानतीय वारंट जारी होने के बाद भी पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी। इसे गंभीरता से लेते हुए पाक्सो कोर्ट ने परसपुर के प्रभारी निरीक्षक को नोटिस जारी कर कोर्ट में हाजिर होकर कारण स्पष्ट करने को कहा है।परसपुर के एक गांव निवासी व्यक्ति ने थाने में केस दर्ज कराकर कहा कि 13 जून 2022 को उसकी 13 वर्ष की बेटी शौच के लिए गई थी। तभी मुन्नन ने उसके साथ छेडछाड़ की और जान से मारने की धमकी दी। पुख्ता साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। विचारण के दौरान आरोपी न्यायालय में हाजिर नहीं हुआ तो 27 सितंबर 2024, पांच नवंबर 2024, एक फरवरी 2025 व 12 मई 2025 को सुनवाई के दौरान न्यायालय ने गिरफ्तारी के लिए गैर जमानतीय वारंट जारी किया।
इसके बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट राजेश नारायण मणि त्रिपाठी ने अदालत के आदेशों का तामीला कराने में लापरवाही के लिए परसपुर के प्रभारी निरीक्षक को पुलिस अधिनियम के तहत नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने प्रभारी निरीक्षक को अंतिम अवसर देते हुए छह अगस्त 2025 को कोर्ट में उपस्थित होने और लिखित आख्या के साथ आदेश का अनुपालन न कराने का कारण स्पष्ट करने का आदेश दिया है।