उमरी बेगमगंज/विश्नोहरपुर। सरयू में उफान से गांवों को जोड़ने वाले रास्तों पर पानी भर गया है। कई मजरे चारों तरफ पानी से घिर गए हैं और घरों तक पानी पहुंचने लगा है। मंगलवार सुबह एल्गिन ब्रिज पर जलस्तर 106.770 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर है। इसका सबसे ज्यादा असर आवागमन, खेती और पशुपालन पर पड़ा है।
ब्योंदा माझा और आसपास के गांवों से रोज हजारों लीटर दूध और कई क्विंटल खोया अयोध्या भेजा जाता है। बाढ़ का पानी भरने से रास्ते मुश्किल हो गए हैं। गंगाराम यादव ने बताया कि पानी के बीच से दूध ले जाना पड़ रहा है। इससे कारोबार प्रभावित होने के साथ ही दूध खराब होने का खतरा भी बना है। दूध की बिक्री पर निर्भर परिवारों की रोज की आमदनी भी प्रभावित हुई है।
दत्तनगर के टाड़ी, बाड़ी, बैसिया, घरुकन पुरवा और नगरिया मजरे पानी से घिरे हैं। ऐली परसौली के 23 मजरे बाढ़ की चपेट में हैं। करीब 860 परिवारों के 4,575 लोग प्रभावित हैं। कई घरों में पानी भरने से लोग गृहस्थी का सामान ऊंचे स्थानों पर रख रहे हैं। गढ़ी, जबरनगर और परास-मझवार की आबादी भी पानी से घिरी है। जग प्रसाद, त्रिलोचन और सुरेश ने बताया कि धान और गन्ने की फसल पानी में डूब गई है। खेतों में पानी भरने से पशुओं के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल हो गया है।
कटान में घर-खेत गए, अब दूसरे की जमीन पर बसे
साकीपुर के राम मनोरथ यादव का परिवार पहले ही कटान में घर और खेत गंवा चुका है। उन्होंने बताया कि अब दूसरे की जमीन पर छप्पर डालकर परिवार गुजर-बसर कर रहा है। पानी बढ़ने के साथ उनकी मुश्किल और बढ़ गई है।
स्कूलों के चारों तरफ पानी, पढ़ाई प्रभावित
दत्तनगर के परिषदीय विद्यालयों के आसपास पानी भरने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। जगमोहन, बेचन और संजीवन ने बताया कि पानी के बीच बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल है।
लंच पैकेट पहुंचे, नाव और चारे की जरूरत
ऐली परसौली बाढ़ चौकी से प्रभावित परिवारों तक लंच पैकेट पहुंचाए जा रहे हैं। तरबगंज विधायक प्रेम नारायण पांडेय ने बाढ़ चौकी पहुंचकर राहत किट वितरित की। ग्रामीणों का कहना है कि भोजन के साथ नाव, पशुओं के लिए चारे और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था भी जरूरी है। कटान में घर-खेत गंवा चुके परिवारों को स्थायी मदद की दरकार है।
ब्योंदा माझा में सड़क पर भरे पानी से होकर जाते ग्रामीण। - संवाद