गोंडा। बेसिक शिक्षकों के तबादले का अवसर सात साल बाद आया है, लेकिन शर्तें ऐसी लगी हैं कि लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। जिले में स्थानांतरण का अवसर शिक्षकों को बीते सात सालों से नहीं मिला है। तीन साल पहले समायोजन हुए थे, उसमें सिर्फ स्कूलों में अधिक शिक्षकों को हटाया गया था। शिक्षकों की जरूरत पर स्थानांतरण नहीं हुआ। यही नहीं 32 सालों से शहरी स्कूलों में शिक्षकों को तैनाती ही नहीं मिली है, जिससे शहरी स्कूल बंद के कगार पर हैं। इस बार उम्मीद थी, उनके बारे में निर्णय होगा। वर्षों से इसकी चिंता जताई जा रही है, कोई फैसला नही हो रहा है।
हर विभाग में तीन सालों से जमे कर्मियों और अधिकारियों को हटाने का समय तय होता है। हर बार एक नीति जारी होने की बात कही जाती है। तीन सालों से तो कोई नीति नहीं आई। उसके पहले समायोजन नीति आई और सरप्लस को हटाने का कार्य हुआ है। बीते साल 1200 से अधिक शिक्षक गैर जिले के लिए स्थानांतरित हो गए। इससे कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। वहीं कई स्कूल ऐसे हैं, जहां शिक्षकों में आपसी विवाद है या फिर ग्राम स्तर के लोगों से किसी तरह का विवाद है। वह सभी किसी दूसरे स्कूल में स्थानांतरण कराकर सुकून से नौकरी करने की उम्मीद लगाए थे।
स्थानांतरण व समायोजन की जो नीति आई है, उससे शिक्षक पसीने-पसीने हैं। उन स्कूलों से स्थानांतरण ही नहीं होना है, जहां शिक्षकों की जरूरत है। पारस्परिक स्थानांतरण के बारे में भी कोई आदेश नहीं है। उम्मीद थी कि बीते 32 सालों से शिक्षकों की तैनाती न होने से शहरी क्षेत्र के 46 स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। सरकार के मंत्रियों की ओर से कई मौके पर शहरी कैडर खत्म करके स्कूलों को शिक्षक नियुक्त करने का दावा किया गया था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। शासन इस मामले पर चुप्पी साधे है। ऐसे में इस बार भी उन्हीं स्कूलों से शिक्षक हटाए जा सकेंगे, जहां शिक्षक अधिक हैं। इसके लिए अब विभाग सर्वे करके स्कूलों को तय करेगा। बताया जा रहा है कि इससे इस बार भी स्थानांतरण होने की कम ही उम्मीद है, ज्यादा से ज्यादा समायोजन ही हो सकेगा।
शासन की ओर से जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी समिति के माध्यम से स्थानांतरण व समायोजन के आदेश मिले हैं। शासन के आदेशों पर ही कार्रवाई की जाएगी। अखिलेश प्रताप सिंह, बीएसए