ढाई साल से बंद पड़े गोंडा-बलरामपुर रेल रूट पर शुक्रवार को सीआरएस की ट्रेन दौड़ पड़ी। ट्रायल में सीआरएस ने गोंडा से बढ़नी के बीच पड़ने वाले सभी स्टेशनों व रेल ट्रैक का बारीकी से निरीक्षण किया। माना जा रहा है कि सीआरएस इस रूट पर परमानेंट ट्रेन संचालन के लिए रेलवे बोर्ड को रिपोर्ट देंगे और बोर्ड नवंबर में ट्रेनों के संचालन को झंडी दे देगा।
शुक्रवार को सुबह नौ बजे सुभागपुर रेलवे स्टेशन पर मुख्य संरक्षा आयुक्त प्रभात कुमार बाजेपयी व डीआरएम आलोक सिंह के साथ पहुंचे। सीआरएस (चीफ सेफ्टी कमिश्नर) ने रेलवे स्टेशन अधीक्षक कार्यालय में बने सिग्नल प्वाइंट और लाइनों का बारीकी से निरीक्षण किया।
इसके बाद उन्होंने मोटर ट्रॉली से सुभागपुर स्टेशन से गोंडा रेलवे यार्ड तक ट्रैक को देखा और कई स्थानों पर उतर कर खामियां दूर करने को कहा।
निरीक्षण के बाद सीआरएस ने अमर उजाला से वार्ता के दौरान बताया कि गोंडा-बढ़नी के बीच 109 किलोमीटर की दूरी है, इसलिए ट्रैक का निरीक्षण करने में तीन दिन लग गए।
उन्होेंने बताया कि सुभागपुर, इटियाथोक, भवानीपुर कला, कौवापुर व तुलसीपुर में कई छोटे-बड़े काम बाकी हैं, जिसमें ब्रिज का एप्रोच मार्ग, क्रॉसिंग लाइन, रेलवे गेट पर इंटरलॉकिंग न होना, ट्रैक पर कई जगह कमियां पाई गईं, जिसे एक सप्ताह के अंदर दूर करने का निर्देश दिया गया है।
इसके बाद गोंडा स्टेशन पहुंचने पर शुक्रवार को दोपहर करीब एक बजे स्पीड पैसेंजर ट्रेन से बढ़नी तक ट्रायल किया। रेलवे सूत्रों के मुताबिक सीआरएस का निरीक्षण और ट्रायल सफल रहा।
सीआरएस गोरखपुर पहुंचकर महाप्रबंधक पूर्वोत्तर रेलवे को रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। फिर नई दिल्ली में बड़ोदरा हाउस में रेलवे बोर्ड को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
इसके बाद नवंबर के प्रथम सप्ताह में इस रूट पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा। इससे गोंडा, बलरामपुर, तुलसीपुर, कौवापुर, बढ़नी होते हुए गोरखपुर तक लोग ट्रेन का सफर कर सकेंगे।
इस लाइन पर ट्रेनों का संचालन शुरू होने से गोंडावासियों को गोरखपुर जाने के लिए एक रूट की सुविधा और मिल सकेगी। इस मौके पर मुख्य इंजीनियर निर्माण कैलाश सिंह, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी एसएल वर्मा, डीके सिंह, स्वदेश कुमार सिंह सहित कई रेलवे के अधिकारी उपस्थित रहे।