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लोकतंत्र के उत्सव में आज 26.68 लाख मतदाता देंगे वोट की चोट

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गोंडा में मतदान कराने जाती महिला कर्मी। - फोटो : GONDA
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गोंडा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में लोकतंत्र के उत्सव सोमवार को पूरे उत्साह के साथ होगा। 26.68 लाख मतदात गांव की सरकार के लिए वोट करेंगे। कोरोना महामारी के बीच 4428 बूथों पर 18 हजार के करीब मतदान अधिकारियों और दस हजार के करीब पुलिस फोर्स ने रविवार की देर शाम मोर्चा संभाल लिया है।
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जिले के 16 ब्लॉकों से पोलिंग पार्टियों की रवानगी सुबह आठ बजे से शुरू हो गई। सुबह के बाद थोड़ा अफरा तफरी रही, लेकिन धीरे-धीरे पोलिंग पार्टियों का मैनेजमेंट अधिकारियों ने करके बूथों की व्यवस्था पूरी कर ली। जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने कहा कि पंचायत चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण होगा।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए रविवार को 16 ब्लाकों से पोलिंग पार्टी रवाना की गईं। पुलिस लाइन से फोर्स शनिवार को ही ब्लाकों पर पहुंच गईं थी, उनकी भी रवानगी बूथों पर हो गया। मतदान अधिकारियों और फोर्स ने बूथों की व्यवस्था को पूरी रात दुरुस्त किया।
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जिले के 1214 पंचायतों में 1203 में प्रधान पदों के लिए और अन्य में जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत के लिए मतदान होंगे। 18 हजार के करीब मतदान अधिकारी पंचायत चुनाव में सोमवार को मतदान कराएंगे। 4428 बूथों पर पंचायत चुनाव के 27 हजार दावेदारों के भाग्य फैसला 26.69 लाख मतदाता करेंगे।
मतदान में 231 सेक्टर मजिस्ट्रेटों के साथ ही 4 जोनल मजिस्ट्रेट व सुपर मजिस्ट्रेट पूरी व्यवस्था संभालेंगे। जिले के 1204 पंचायतों के प्रधान पदों, 1612 क्षेत्र पंचायत सदस्य पदों, 15410 सदस्य ग्राम पंचायतों और 65 सदस्य जिला पंचायतों के पदों पर होने वाले चुनाव में बैलेट बाक्स का उपयोग होगा।
पोलिंग पार्टियों के रवानगी के समय प्रोटोकॉल टूटता दिखा। मतदान अधिकारी सहमे तो दिखे, लेकिन कार्रवाई के डर के आगे कोरोना का प्रोटोकॉल भूल गए। हर स्थान पर न तो सोशल डिस्टेंसिंग दिखी और न ही कोई सतर्कता ही दिखी।
स्थिति यह हो गई कि लोग एक दूसरे से सटकर अपनी ड्यूटी पता कर रहे थे। कई ब्लॉकों के पोलिंग रवानगी स्थल पर अव्यवस्था भी दिखी। सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने कई स्थानों का निरीक्षण कर चेतावनी भी दी। उन्होंने ड्यूटी पर जोर देने के साथ ही प्रोटोकाल के पालन की नसीहत भी दी।
कई मतदान अधिकारी भी कोरोना के चपेट में आ गए। बभनजोत में ड्यूटी करने जा रहे एक मतदान अधिकारी को अस्पताल से फोन गया तो वह रास्ते से लौटे। प्रतीक श्रीवास्तव की ड्यूटी लगी थी, बीते दिन उनके रिश्तेदार की कोरोना पॉजिटिव से मौत हो गई थी, उन्होंने भी जांच कराई।
उसकी रिपोर्ट भी पाजिटिव आई, जिससे उन्हें रास्ते से लौटना पड़ा। उन्होंने फोन पर ही सूचना दी। इसी तरह कई कर्मचारियों की कोरोना रिपोर्ट पाजिटिव आई है। उनमें खलबली मची रही।
प्रशासन की संवेदनहीनता भी साफ-साफ दिखी। करनैलगंज की शिक्षिका बेला मिश्रा के पति का बीते दिनों निधन हो गया था। वह परिवार में भी अकेली ही हैं, खंड शिक्षा अधिकारी ने रिपोर्ट भी दी थी।
लेकिन उनके स्थान पर किसी अन्य की ड्यूटी नही लगाई गई। ड्यूटी के लगातार उसे फोन होता रहा है और वह रोते हुए अधिकारियों से अपनी व्यथा बताती रहीं। अधिकारी की ऐसी अनदेखी पहली बार देखने को मिला।
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