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गांवों में शिक्षा उत्सव मनाएंगे तीन हजार प्रधानाध्यापक

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गोंडा। बेसिक शिक्षा के तीन हजार परिषदीय स्कूलों के विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को शिक्षा से सीधे जोड़ने का अभियान चलेगा। स्कूलों के तीन हजार प्रधानाध्यापक गांवों में हर हफ्ते चौपाल लगाकर प्रेरणा उत्सव मनाएंगे।
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मिशन प्रेरणा से प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरणा उत्सव का 100 दिवसीय अभियान शुरू होगा। इसके साथ ही प्रधानाध्यापकों एवं प्रधानाध्यापिकाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए स्कूल लीडरशिप डेवलपमेंट कार्यक्रम भी शुरू होगा।
राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान की ओर से स्कूल लीडरशिप प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित होग। जिसके तहत शिक्षक प्रशिक्षण पाएंगे।
मिशन प्रेरणा के तहत बुनियादी शिक्षा समझने के लिए प्रति सप्ताह शिक्षा चौपाल का आयोजन प्रधानाध्यापक करेंगे। इसके अलावा परिषदीय स्कूलों में 500 से 1000 एनसीईआरटी की पुस्तकों से युक्त क्रियाशील पुस्तकालय और रीडिंग कॉर्नर बनाए जाएंगे।
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जिससे लोगों का स्कूल से सीधा जुड़ाव हो। बुनियादी शिक्षा का कौशल बढ़ाने के लिए प्रत्येक छात्र को ग्रेडेड रीडिंग बुक दी जा रही है। आधारशिला, शिक्षण संग्रह में तकनीक एवं बुनियादी शिक्षा पर आधारित लगभग 100 वीडियो भी तैयार किए गए हैं।
निशुल्क पाठ्य पुस्तकों पर आधारित 800 वीडियो व दीक्षा ऐप पर उपयोग के लिए 4000 से अधिक वीडियो विजुअल्स शिक्षण सामग्री समेत उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दीक्षा एप के माध्यम से दस हजार शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है।
गांवों में जगाई जाएगी शिक्षा की अलख
गांवों में शिक्षा की अलख जगाने के लिए शिक्षक अभियान चलाएंगे। छात्रों, अभिभावकों व शिक्षकों को मिशन प्रेरणा से प्रोत्साहित करने के लिए 100 दिन का ‘प्रेरणा उत्सव अभियान’ चलाया जाएगा।
मिशन प्रेरणा को जनांदोलन बनाया जाएगा। मिशन प्रेरणा की ई-पाठशाला फेज टू, दीक्षा एप, रीड एलांग एप की विधिवत जानकारी सभी को दी जाएगी। मिशन प्रेरणा कार्यक्रम से सीधे जन समुदाय को जोड़ा जाएगा।
बच्चों का होगा उपचारात्मक प्रशिक्षण, होगा मूल्यांकन
प्रशिक्षण दीक्षा एप में 4000 से भी अधिक शैक्षिक वीडियो, शैक्षिक सामग्री व डिजिटल फॉर्म भी हैं। जब बच्चे स्कूल आएंगे तो उनका आंकलन प्रपत्र के माध्यम से मूल्यांकन होगा।
लर्निंग ह्रास का पता लगने के बाद चिह्नित बच्चों को उपचारात्मक शिक्षण दिया जाएगा। प्रेरणा उत्सव में विद्यालयों में ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत ग्रामप्रधानों, जनप्रतिनिधियों, समुदाय के लोगों से सहयोग लेकर विद्यालय की अवस्थापना सुविधाएं पूर्ण कराई जाएंगी।
विद्यालयों की रंगाई पुताई, वॉल पेंटिंग, प्रिंट रिच मैटेरियल विद्यालयों को आकर्षक बनाने, बच्चों में ठहराव लाने के साथ ही कक्षा कक्ष में सेल्फ स्टडी हेतु प्रेरित किया जाएगा।
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शैक्षिक विकास के लिए गांव स्तर पर अभियान शुरू किया जा रहा है। शिक्षा चौपाल से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
- विनय मोहन वन, सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा
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